चंबा के बैरागढ़ साच-पास-किलाड़ मार्ग पर रानीकोट के पास मार्ग पर जलता चीड़ का पेड़। संवाद
तीसा (चंबा)। बैरागढ़-साचपास-किलाड़ मार्ग पर 50 गाड़ियों में सवार 200 सैलानी रानीकोट के पास तीन घंटे तक फंसे रहे। रानीकोट के समीप चीड़ का पेड़ का सड़क के बीच गिर गया था। ऐसे में मार्ग पूरी तरह से वाहनों की आवाजाही के लिए बंद पड़ गया। मार्ग के बाधित होने से बाहरी राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, चन्नेई, उत्तराखंड और हिमाचल से घूमने के लिए परिवारों संग पहुंचे सैलानियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ऐसे में काफी देर तक मार्ग को खोलने के लिए कोई भी प्रयास न हो के बाद आखिरकार पर्यटकों ने अपने स्तर पर रस्सी और गाड़ियों की मदद से पेड़ को हटाने की भरसक कोशिश की लेकिन वे उसमें नाकाम साबित हुए। आखिरकार बैरागढ़ से एक स्थानीय व्यक्ति कट्टर लेकर मौके पर पहुंचा। इसके बाद कड़ी मशक्कत से जलते हुए पेड़ को बीच से काट कर रस्सियों और गाड़ियों की मदद से हटाया गया। देर शाम करीब छह बजे के करीब मार्ग बहाल होने के बाद पर्यटकों ने राहत की सांस ली और वे रानीकोट से बैरागढ़ के लिए रवाना हो पाए। सैलानियों राकेश कुमार, मनोज कुमार, प्रमोद कुमार, सचिन कुमार, दीपक कुमार, योगराज, प्रताप चंद, नरेश कुमार, अखिल ने प्रकृति को आग के हवाले करने वाले शरारती तत्वों पर नकेल कसने की मांग उठाई है।
गौरतलब है कि मैदानी इलाकों में पड़ने वाली प्रचंड से छुटकारा पाने के लिए बाहरी राज्यों के लोग साच पास घूमने के लिए पहुंच रहे हैं। शनिवार दोपहर बाद तीन बजे के करीब साच पास से लौटते समय सैलानी जब रानीकोट के समीप पहुंचे तो वहां पर शरारती तत्वों की ओर से चीड़ के पेड़ में लगाई गई आग के कारण पेड़ बीच से टूट कर सड़क के बीच आ गिरा। गनीमत रही कि उस दौरान कोई वाहन वहां से गुजर नहीं रहा था अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। इस स्थान पर न तो लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी और मशीनरी थी और न ही कोई पुलिस कर्मी वहां पर तैनात था। इतना ही नहीं, रानीकोट के समीप नेटवर्क की सुविधा भी नहीं है जिस कारण पर्यटक प्रशासन को भी सूचित तक नहीं कर पाए।