चंबा जिले के मेडिकल कॉलेज में मुफ्त होने वाले टेस्ट के मरीजों को निजी प्रयोगशाला में 200 से 500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। गर्भवती महिलाओं सहित किडनी और लीवर से पीड़ित मरीजों को यूरिन टेस्ट करवाने के लिए निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है। यहां उनसे मनमाने दाम वसूल किए जा रहे हैं जबकि सरकारी प्रयोगशाला में इस टेस्ट को मुफ्त करने का प्रावधान है। पिछले चार साल से मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी लैब में ये टेस्ट नहीं हो रहे हैं। इससे मरीजों को यूरिन टेस्ट करवाने के लिए शहर की निजी लैबों में जाना पड़ रहा है जहां पर उनसे मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। सरकारी लैब में पहले ये टेस्ट दस रुपये में किया जाता था लेकिन जब सरकार ने सभी टेस्ट मुफ्त करने की घोषणा की तो मरीजों से इस टेस्ट के पैसे नहीं लिए जाते थे लेकिन पिछले चार साल से चंबा मेडिकल कॉलेज में यह टेस्ट नहीं हो रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में कहीं पर भी महिला रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं है।
इसके चलते जिले की गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य जांच के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज पहुंचती हैं। विशेषज्ञ सबसे पहले उन्हें को यूरिन टेस्ट करवाने का परामर्श देते हैं। इससे संक्रमण की सही जांच होती है। इसके अलावा पथरी, किडनी और लीवर के अलावा पेट की सभी बीमारियों का पता लगाने के लिए भी विशेषज्ञ मरीजों को यूरिन टेस्ट करवाने का परामर्श देते हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 100 मरीजों को विभिन्न ओपीडी में यूरिन टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है लेकिन जब मरीज सरकारी प्रयोगशाला में जाते हैं तो उन्हें टेस्ट करने से मना कर दिया जाता है। इसके बाद मरीजों को मजबूरी में निजी प्रयोगशाला का रुख करना पड़ता है। मरीज पहले भी कई बार स्वास्थ्य विभाग में अपनी शिकायत कर चुके हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में विभाग ने कोई कदम नहीं उठाए हैं। कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि यूरिन टेस्ट नहीं होने की उन्हें जानकारी नहीं है। इसका पता लगाकर टेस्ट शुरू करने की व्यवस्था की जाएगी। मरीजों को मेडिकल कॉलेज में सभी प्रकार के टेस्ट मुफ्त करवाने की सुविधा प्रदान की जा रही है।