अमर उजाला ब्यूरो
तेलका (चंबा)। विकास खंड सलूणी की ग्राम पंचायत बाड़का, सेरी और करवाल के किसान पिछले कई वर्षों से बंदरों के उत्पात के कारण किसानों ने खेतीबाड़ी छोड़ दी है। हालत यह है कि किसानों को खेती बचाने के लिए दिन भर पहरा देना पड़ता है। बावजूद इसके फसलों को बचाना मुश्किल हो गया है। बंदरों की समस्या से क्षेत्र झौड़ा, डिभर, पुखरी, इंगलोई, सलौट, टिकरी, भड़ेई, आसा, सेरू, मांजू, छतरेल, कुंड, छंबर, घेका, किलर, संधवार, नगाली और इछलेई के अलावा कई गांवों में बंदरों का आतंक है। आलम यह है कि ज्यादातर लोगों ने इस डर से खेतीबाड़ी करना तक छोड़ दिया है। इस वजह से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसान चैन लाल, देस राज, बिंदरो राम, गनी मोहम्मद, बशीर खान, बालम राम, जग्गू राम, रमेश कुमार, कृष्ण कुमार, राजेश कुमार, शिव कुमार, हेमराज, अनिल कुमार, अनीस खान, मदनलाल, पवन कुमार और घीलो राम का कहना है कि पिछले चुनावों के समय पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में बंदरों से निजात दिलाने के दावे किए थे। मगर कोई भी अपने दावे को पूरा नहीं कर पाया। उन्होंने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी पंचायतों को बंदर मुक्त किया जाए।