फसल को कोल्ड स्टोर और मार्केट उपलब्ध कराई जाए
चंबा जनमत निर्माण अभियान के दौरान उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। जिले में खेतीबाड़ी तो लोग करते हैं लेकिन, उन्हें अपनी फसल को पहुंचाने के लिए ऐसी मार्केट ही उपलब्ध नहीं है, जहां पर उसका उचित दाम मिल सके। यदि मार्केट उपलब्ध होती है तो किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ हो सकती है। वैसे भी जिले के 69 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं जबकि यहां लगभग 10 फीसदी जमीन ही खेती के लायक है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहां के अधिकतर इलाकों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता है। इसलिए यहां की उपज प्राकृतिक और जैविक है। कमी है तो सिर्फ फसलों के भंडारण और विक्रय की सुविधाओं की। यदि किसानों को कोल्ड स्टोर, कृषि मंडी और मार्केटिंग की सुविधा मिले तो किसानों की आर्थिकी को बड़ा बल मिलेगा। यह बात शुक्रवार को चंबा जनमत निर्माण अभियान के तहत लोगों ने प्रमुखता से उठाई है। अभियान का हिस्सा बने चुराह, भटियात, तीसा, भरमौर और सलू्णी के किसानों ने यह मांग रखी कि अगर उन्हें मार्केट उपलब्ध करवाई जाती है तो उनकी फसलों का उन्हें उचित दाम मिल सकता है। शुक्रवार को अभियान का काफिला साल घाटी, चुवाड़ी, बियूटू, घरेड़, बन्नी, माल्ला और क्वांरसी पहुंचा। इस दौरान मोनिका, नितिन और सक्षम ने बताया कि यहां के किसान खेती तो जैविक तरीके से करते है लेकिन ज्यादातर किसान अपने जरूरत के हिसाब से फसलें लगाते हैं क्योंकि, ज्यादा फसल तैयार होने पर उसे सुरक्षित रखने और उन्हें मार्केट तक ले जाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। क्वांरसी के अतुल बताते हैं कि जनजातीय क्षेत्र क्वांरसी की खेतीबाड़ी यहां के किसान जैविक तरीके से करते हैं। फसलें भी अच्छी होती हैं। लेकिन, अधिक फसल होने पर उसे बेचें किसे? क्योंकि, मार्केट तक पहुंचाते-पहुंचाते ही किसान देते-देते लुट जाता है। समस्या कनेक्टिविटी की है। अगर कनेक्टिविटी ठीक हो जाती है तो यहां के किसान अपनी फसल को सही जगह बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उधर, सेवा हिमालय के संयोजक मनुज शर्मा ने बताया कि शुक्रवार का अभियान कृषि पर आधारित रहा। इस दौरान किसानों ने अपनी फसलों को सुरक्षित रखने और उन्हें मार्केट तक पहुंचाने के लिए कोल्ड स्टोर और सब्डी मंडी का निर्माण करवाने की मांग प्रमुखता से उठाई।