फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच माह पाताल में रहने के बाद कैलाश पर्वत पहुुंचेंगे भगवान शंकर

विज्ञापन
मणिमहेश - फोटो : Demo pic
विज्ञापन

रणजीत शर्मा

विज्ञापन

भरमौर ( चंबा )। पांच माह तक पाताल में रहने के बाद भगवान शंकर शिवरात्रि के पावन अवसर पर कैलाश पर्वत के लिए प्रस्थान करेंगे। इस दौरान भरमौर स्थित धर्मराज मंदिर में विशेष-पूजा का आयोजन किया जाता है। इसमें भारी संख्या में श्रद्धालु धर्मराज मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। सुबह से लेकर शाम तक मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। ऐसी मान्यता है कि मणिमहेश यात्रा के बड़े स्नान राधाष्टमी के बाद भगवान शिव कैलाश छोड़कर पाताल लोक में भक्तों के पास चले जाते हैं। पवित्र महाशिवरात्रि के दिन ही अपने कैलाश धाम में लौटते हैं। महाशिवरात्रि के दिन जगह-जगह पर शिव मंदिर को सजाया जाता है, ताकि कैलाश धाम जाते समय भगवान शंकर कुछ पल वहां रुक सकें। चौरासी परिसर के शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा हुई। इसे देखने के लिए दूर-दूर से शिव भक्त पहुंचे। इस बार शिवरात्रि के दिन भरमौर में 30 सेंटीमीटर बर्फबारी के बीच शिवरात्रि पर्व मनाया गया। बर्फबारी में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। धर्मराज मंदिर के पुजारी पंडित लक्ष्मण दत्त शर्मा और मणिमहेश मंदिर के पुजारी पंडित हरिशरण शर्मा बताते हैं कि साल में महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य पर मणिमहेश मंदिर और धर्म राज मंदिर पर चार पहर पूजा की जाती है। यह पूजा शाम क्रमश नौ, बारह, दो और सुबह चार बजे की जाती है। इसमें भगवान शंकर और धर्मराज के शिव लिंग रूप को गंगाजल, दूध, दही, शहद, शक्कर, बिल्व पत्र और जनेऊ से अभिषेक किया जाता है। मंगलवार को शिवरात्रि पर्व के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मराज मंदिर के दर्शन किए। सभी शिव भक्तों ने शिवरात्रि का व्रत भी रखा। ऐसी मान्यता है कि शिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्तों की मनोकामना को भगवान शंकर अवश्य ही पूरा करते हैं। इसी मान्यता के अनुसार भक्तों ने व्रत रखा और भगवान शंकर की पूजा की।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें