अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। जिला में बारिश न होने की वजह से सेब की पैदावार पर संकट के बादल छा गए हैं। इसकी वजह यह है कि 1200 से 1800 के बीच पर्याप्त (चिलिंग ऑवर) द्रुत शीतन घंटे न होने के चलते सेब का आकार छोटा रह जाता है। इस वजह से बागवानों को इसके अच्छे दाम नहीं मिल पाते हैं। जिले के भरमौर, तीसा, सलूणी, जुम्महार और होली इत्यादि क्षेत्रों में सेब की खूब पैदावार होती है। मणि महेश यात्रा के दौरान भी बड़ी संख्या में यहां से सेब का कारोबार किया जाता है। मगर इस वर्ष पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने के कारण बागवान परेशान है। बागवान विनोद कुमार, सुरेंद्र कुमार, राम सिंह, उत्तम दास, परमेश कुमार और कल्याण सिंह का कहना है कि पिछले डेढ़ माह से जिला में ड्राई स्पैल चल रहा है। इस बार दिसंबर के बाद अब तक बर्फबारी नहीं हो पाई है। दिसंबर माह में ऊंचाई वाले क्षेत्र भरमौर, होली, तीसा और सलूणी में हिमपात हुआ था। इसके मुताबिक उम्मीद की जा रही थी कि इस बार दिसंबर में बर्फबारी होने से नियमित अंतराल के बाद बारिश और बर्फबारी होती रहेगी। इससे सेब की पैदावार बंपर होने की उम्मीद थी। मगर पिछले डेढ़ माह से बर्फबारी तो दूर बारिश तक ही बूंदे नहीं गिरी है। इससे सेब की बंपर पैदावार की उम्मीद बागवानों की धूमिल हो रही है। उद्यान विभाग के उपनिदेशक केएल शर्मा का कहना है कि सेब की बेहतर पैदावार के लिए तापमान अनुकूल और बगीचों में नमी रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाहरी सेब के दाम ज्यादा होते है। जबकि स्थानीय सेब की कीमत में थोड़ी कमी होती है।