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एम्स बिलासपुर में चिकित्सकों ने की किडनी की बायोप्सी

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एम्स बिलासपुर में दोपहर बाद ऑफलाइन पर्ची बनवाने के लिए लाइन में खड़े लोग। संवाद - फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर में आईपीडी के लोकार्पण के बाद नैफ्रोलॉजी विभाग ने पहली सफल किडनी की बायोप्सी की है। कुछ दिन पहले ही यह बायोप्सी हुई है। इससे पहले बायोप्सी के लिए इस विभाग के मरीजों को शिमला और चंडीगढ़ का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब उन्हें बिलासपुर में ही यह सुविधा मिल रही है।
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बिलासपुर एम्स की बात करें तो रोजाना सभी विभागों की यहां पर 600 से ज्यादा की ओपीडी हो रही है। इनमें मेडिसिन विभाग की सबसे अधिक ओपीडी 200 के करीब होती है। वहीं नेफ्रोलॉजी, ऑर्थो, स्किन, सर्जरी, ईएनटी व अन्य मुख्य विभागों में भी रोजाना 60-70 मरीज पहुंचते हैं। मेडिसिन विभाग में जांच के लिए मरीजों को एक से दो सप्ताह तक का समय पहले लेना पड़ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बिलासपुर जिले में कहीं भी मेडिसिन विशेषज्ञ नहीं है। सर्दी जुकाम वाले मरीजों को भी एम्स की ओर रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में एम्स के चिकित्सकों काम बढ़ गया है।
अगर जिला अस्पताल में एमडी मेडिसिन की नियुक्ति हो जाती है तो एम्स के चिकित्सक विशेष मरीजों को जल्द समय दे पाएंगे। लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है।
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एम्स बिलासपुर में आपातस्थिति की सभी सुविधाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। इनमें कॉर्डियोलॉजी विभाग की सेवाएं, सीटी स्कैन, एमआरआई प्रमुख हैं। आईपीडी शुरू न होने से पहले लोगों को इन स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए टांडा, शिमला,नेरचौक और पीजीआई जाना पड़ता था। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एम्स के लोकार्पण के बाद यहां पर करीब 300 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा मेडिसिन विभाग के ही मरीज शामिल हैं।
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