एम्स में आयोजित कार्यशाला में भाग लेने पहुंचे विशेषज्ञ। स्रोत: आयोजक
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पीजीआई चंडीगढ़ समेत कई संस्थानों के विशेषज्ञों ने चिकित्सकों को दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ब्रेन स्टेम डेथ की पहचान और नियमानुसार घोषणा के बाद अंगदान की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए एम्स बिलासपुर में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें संभावित अंगदाता की पहचान, आईसीयू में चिकित्सकीय प्रबंधन और परिवार से अंगदान के संबंध में बातचीत समेत विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में एम्स बिलासपुर के अलावा सोटो हिमाचल प्रदेश, रोटो नॉर्थ और पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञ शामिल हुए। एम्स के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने कहा कि ब्रेन स्टेम डेथ के मामलों में समय पर पहचान बेहद जरूरी है। इसके लिए मेडिकल टीम का प्रशिक्षित होना आवश्यक है। सोटो हिमाचल प्रदेश के नोडल अधिकारी एवं आईजीएमसी शिमला के सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पुनीत महाजन ने प्रदेश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने ब्रेन स्टेम डेथ की पहचान, घोषणा और संभावित अंगदाताओं के आईसीयू प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने कहा कि ब्रेन स्टेम डेथ को लेकर सही जानकारी का अभाव अंगदान में बाधा बन सकता है। नियमानुसार घोषणा के बाद उपयुक्त परिस्थितियों में परिवार की सहमति से मृतक अंगदान किया जा सकता है। इससे जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपण के माध्यम से नया जीवन मिल सकता है। कार्यशाला में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के प्रशिक्षण तथा अंगदान से जुड़े विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। अंत में सोटो हिमाचल प्रदेश के संयुक्त निदेशक डॉ. निशांत नड्डा ने सभी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार जताया।