बिलासपुर। जिले में अब तक 5,043 मवेशी लंपी रोग से संक्रमित हुए हैं। हालांकि अब लंपी संक्रमण का प्रकोप कम हो गया है। पशुपालन विभाग के अनुसार संक्रमण नियंत्रण में हैं और रोजाना दो से तीन मामले ही सामने आ रहे हैं। सोमवार को तीन नए मामले दर्ज हुए है।
जिले के सभी उपमंडलों में लंपी संक्रमण ने कहर मचाया है। अब तक 355 मवेशियों की मौत हो चुकी है। सबसे अधिक मौतें सदर उपमंडल में हुई हैं। स्वस्थ होने वाले मवेशियों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को चार मवेशी स्वस्थ हुए हैं। अब तक 4,680 पशु स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि आठ मवेशी रोग ग्रस्त हैं। ऐसे पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है।
जिला बिलासपुर में लंपी रोग का पहला मामला 27 जुलाई लुहणू गांव में सामने आया था। इसके बाद लंपी का संक्रमण बढ़ गया। एक समय तो 150 से 200 मामले रोजाना दर्ज किए जा रहे थे। 6 अगस्त से पशुओं में लंपी रोग के बचाव के लिए टीकाकरण का कार्य शुरू कर किया गया। अभियान के तहत अब तक करीब 18,300 मवेशियों को रोग निरोधक टीके लगाए गए। इसके अलावा केंद्र सरकार के विशेषज्ञों टीम ने भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया था। टीम ने सैंपल लिए थे और विभाग को इसकी रोकथाम के जरूरी दिशा निर्देश दिए थे।
उधर, पशुपालन विभाग बिलासपुर के उप निदेशक विपिन कुमार ने बताया कि विभाग लंपी रोग के मामले में पूरी तरह से संवेदनशील है। अभी भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पूरे समन्वय के साथ रोग की रोकथाम का कार्य हो रहा है। अब रोग नियंत्रण में है। उम्मीद है कि जल्द ही रोग की पूरी तरह से रोकथाम हो जाएगी। उन्होंने जनता से यह भी आग्रह किया कि अपने घरों के आस पास गंदा पानी जमा न होने दें। पशुपालकों में कुछ अफवाह फैली हुई है कि इन बीमारी ग्रस्त पशुओं का दूध नहीं पीना है। लेकिन दूध को अच्छी तरह उबालने से विषाणु खत्म हो जाता है इसलिए दूध को उबाल कर पी सकते हैं। अफवाहों पर ध्यान न देते हुए विभागीय दिशा निर्देशों का पालन करें।