बिलासपुर। बिलासपुर। औद्योगिक क्षेत्र स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को कथा व्यास आचार्य सुनील वशिष्ठ ने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग सुनाए। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। आचार्य सुनील वशिष्ठ ने श्री शुकदेव जी के जन्म, कपिल गीता, ब्रह्माजी की ओर से सृष्टि रचना, भगवान के विभिन्न अवतारों और सांख्य योग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास के पुत्र श्री शुकदेव जी जन्म से ही ब्रह्मज्ञानी थे। उनका जीवन वैराग्य और आत्मज्ञान की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान उन्होंने राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि जब उत्तरा के गर्भ पर संकट आया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं रक्षा कर राजा परीक्षित के प्राण बचाए। इसके बाद उन्होंने राजा परीक्षित के वैराग्य और श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के महत्व को भी बताया। आचार्य वशिष्ठ ने कहा कि मनुष्य के जीवन का वास्तविक सुख भगवान की भक्ति में है। ईश्वर के नाम का स्मरण और भागवत कथा का श्रवण व्यक्ति को आत्मिक शांति और आनंद प्रदान करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रभु भक्ति को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।