लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित कथा में कथा श्रवण करते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। औद्योगिक क्षेत्र स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य सुनील वशिष्ठ ने कपिल उपदेश, ध्रुव चरित्र, विदुर चरित्र, जड़भरत प्रसंग और भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। आचार्य ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि बाल अवस्था में ध्रुव ने कठिन तपस्या और अटूट भक्ति से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। उनका जीवन दृढ़ संकल्प और ईश्वर के प्रति विश्वास की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी भक्त प्रहलाद की भक्ति अडिग रही। उनकी रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर अधर्म का अंत किया। उन्होंने विदुर-मैत्रेय संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने विदुर के घर प्रेम से परोसे गए साग-पात को स्वीकार किया। इससे संदेश मिलता है कि भगवान वस्तु नहीं, भक्त का भाव देखते हैं।