बध्यात में टनल नंबर-17 के बाहर धरने पर बैठे भानुपल्ली.बिलासपुर रेल लाइन परियोजना के निर्माण से
-भूख हड़ताल के भी 249 दिन पूरे, न सरकार ने सुनी न प्रशासन ने
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विकास की पटरियां बिछाने वाली भानुपल्ली-बिलासपुर रेल परियोजना अब नोग बध्यात के ग्रामीणों के लिए अनंत संघर्ष का पर्याय बन गई है। बध्यात में टनल नंबर-17 के निर्माण से प्रभावित ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। रविवार को उनके आंदोलन ने 274 वें दिन में प्रवेश कर लिया, जबकि क्रमिक भूख हड़ताल के भी 249 दिन पूरे हो गए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि करीब नौ महीने से जारी इस शांतिपूर्ण सत्याग्रह के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। रविवार को कड़कड़ाती ठंड और अनिश्चित मौसम के बीच रामलाल, बुधराम, सोहनलाल, मीना देवी और बंटी देवी क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे। धरना स्थल पर डटे इन प्रभावितों के चेहरों पर थकान तो है, लेकिन हक पाने का जज्बा कम नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि टनल निर्माण ने उनके घर और जमीनों को जो जख्म दिए हैं, उन्हें भरने के बजाय प्रशासन ने चुप्पी साध ली है। प्रभावित परिवारों ने कड़े शब्दों में रोष प्रकट करते हुए कहा कि यह धरना कोई शौक नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण उपजी मजबूरी है। 274 दिन बीतने के बाद भी किसी उच्च अधिकारी ने मौके पर आकर नुकसान का वास्तविक आकलन नहीं किया। प्रशासन केवल मौखिक दिलासे देता रहा है, जबकि ग्रामीण अब ठोस लिखित कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। टनल की खुदाई से घरों में आई दरारों और कृषि भूमि के नुकसान ने ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। धरना स्थल से प्रभावितों ने कहा कि प्रशासन की यह चुप्पी उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर मौके पर आकर जायजा नहीं लिया जाता और लिखित में राहत का रोडमैप नहीं दिया जाता, तब तक यह धरना और भूख हड़ताल अनवरत जारी रहेगी। 274 दिन कम नहीं होते। हम यहां अपनी पीढ़ियों की कमाई और आशियाने को बचाने के लिए बैठे हैं। क्या प्रशासन को हमारी सुध लेने के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार है।