चंद्रग्रहण के दौरान सूना पड़ा श्री नयनादेवी जी मंदिर। संवाद
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श्री नयनादेवी जी (बिलासपुर)। विश्वविख्यात शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी में मंगलवार को चंद्रग्रहण के कारण सायंकालीन आरती के समय में बदलाव किया गया। हर रोज शाम 6:30 बजे मंदिर के कपाट आरती के लिए बंद किए जाते हैं, लेकिन चंद्रग्रहण के कारण मंगलवार को 7:30 बजे कपाट बंद हुए और आरती के बाद 8:30 बजे कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। वहीं, शयन आरती अपने निर्धारित समय पर ही हुई। मंगलवार को करीब पांच हजार श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेका।
मंदिर के मुख्य पुजारी प्रवेश शर्मा ने कहा कि चंद्रग्रहण के कारण सायंकालीन आरती के समय में बदलाव किया गया। चंद्रग्रहण का समापन 6:20 बजे तक था। इसके उपरांत ही शाम को होने वाली आरती की सारी गतिविधियां प्रारंभ की गईं। गौरतलब है कि नयनादेवी मंदिर में दिन में पांच आरतियां होती हैं जिनमें सुबह 4:00 बजे मंगल आरती जिसमें माता जी के शयन को उठाया जाता है और प्रसाद का भोग लगाया जाता है। शृंगार आरती सुबह 6:30 बजे होती है उसमें माताजी के स्नान के साथ शृंगार होता है और आरती में हलवा और बर्फी का प्रसाद माताजी ग्रहण करती हैं। मध्याह्न आरती दोपहर 12:30 बजे होती है, राजसी भोजन का प्रसाद माताजी के समक्ष अर्पित किया जाता है। सायंकालीन आरती 6:30 बजे होती है, जिसमें चने और पूरी का प्रसाद माता को भोग लगाया जाता है। शयन आरती 9:30 बजे रात्रि को होती है, जिसमें दूध, बर्फी और फल का प्रसाद भोग में लगाया जाता है। रात 10:00 बजे मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं जो सुबह 4:00 बजे खुलते हैं।