हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्क्रब टाइफस के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बुधवार को एक व्यक्ति स्क्रब टाइफस से संक्रमित पाया गया है, जबकि मंगलवार को तीन मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। जिले में स्क्रब टाइफस से अब तक 184 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इसके विपरीत डेंगू की स्थिति स्थिर बनी हुई है। पिछले तीन दिन से डेंगू का एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार सतर्क रहने की आवश्यकता है। डेंगू के अभी तक 42 मामले सामने आ चुके हैं।
मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को डेंगू और स्क्रब टाइफस के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इनसे डरने की आवश्यकता नहीं है। स्क्रब टाइफस का बेहतरीन इलाज उपलब्ध है। स्क्रब टाइफस बैक्टीरियल रोग है। यह परजीवी बैक्टीरिया है। चूहे इस रोग के फैलाने वाले मुख्य वाहक हैं। खेतों और झाड़ियों में रहने वाले चूहों में पाया जाने वाले चिगर्स कीट के काटने से लोगों में स्क्रब टाइफस फैलता है। इस कारण खेतों में काम करने वाले किसानों और बागवानों को इसके संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।
ये हैं स्क्रब टायफस के लक्षण
अचानक ठंड लगना, बुखार होना, तेज सिर दर्द होना, उल्टी लगना, पेट में दर्द, पाचन की समस्या होना, कीट के डंक मारने का घाव होना और सूजन आना, हाथ-पैरों में तेज दर्द होना, शरीर पर लाल चकते होना, आंखों के आसपास दर्द होना स्क्रब टाइफस के लक्षण हैं।
बचाव के उपाय
स्क्रब टायफस से बचाव के लिए घरों के आसपास साफ-सफाई रखें। घर से बाहर जाते समय जूते और शरीर को पूरे ढकने वाले कपड़े पहनें। घर और खेतों में झाड़ियों को बड़ा न होने दें और उनकी कटाई करते रहें। बुखार होने पर चिकित्सक से उपचार कराएं। वहीं, डेंगू से बचाव के लिए घर के आसपास पानी का जमाव न होने दें।