बिलासपुर। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे जहां कई संशय दूर होते हैं, वहीं आत्मिक और मानसिक शांति भी मिलती है। दनोह-कुनाला के गोपाल मंदिर में कथा व्यास आचार्य जीवानंद शैल ने श्रीमद्भागवत कथा की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि कथा सुनने का सौभाग्य जन्म-जन्मांतरों के पुण्यों के संयोग से ही मिल पाता है। अन्य युगों में मोक्ष और धर्म लाभ प्राप्त करने के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, लेकिन कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है। कथा एक कल्प वृक्ष की तरह है, जो कई इच्छाओं की पूर्ति कर सकती है। वराह अवतार की कथा सुनाते हुए आचार्य शैल ने कहा कि यह शब्द वर+अह से बना है, जिसका अर्थ अच्छे दिन है।