घुमारवीं उपमंडल के हवाण गांव में धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर दर्ज दो एफआईआर मामले में बिलास
रैली निकाल दोनों एफआईआर की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग, पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं उपमंडल के हवाण गांव में धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर दर्ज दो एफआईआर का मामला जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। मंगलवार को ग्रामीणों ने अधिवक्ता तुषार डोगरा की अगुवाई में गुरद्वारा चौक से उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली और उपायुक्त बिलासपुर को ज्ञापन सौंपकर दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों ने ज्ञापन की प्रतियां राज्यपाल, मुख्यमंत्री, डीजीपी हिमाचल प्रदेश और पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को भी भेजी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सात जून को हवाण गांव में कुछ लोग ग्रामीणों को हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें रोकने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। इसके बाद पुलिस ने 17 ग्रामीणों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। ग्रामीणों के अनुसार, इसी घटनाक्रम से जुड़े दूसरे मामले में संदीप कुमार की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उसे हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए पांच लाख रुपये का लालच दिया गया था। ग्रामीणों ने कहा कि दोनों पक्षों के लोगों के मेडिकल करवाने के साथ ही उनके बयान भी दर्ज किए गए और बाद में उन्हें जमानत मिल गई। ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 22 जुलाई को राधे श्याम, विशाल चंदेल, सूर्य चंदेल, रमाकांत शर्मा, संदीप और रविंद्र ठाकुर को गिरफ्तार किया गया। उनका दावा है कि करीब 45 दिन बाद मामले में हत्या के प्रयास और एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराएं जोड़ी गईं। ग्रामीणों ने इसे राजनीतिक दबाव में की जा रही एकतरफा कार्रवाई बताया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर उकसाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में लागू धर्मांतरण संबंधी कानून के तहत भी पूरे मामले की जांच करने की मांग की। ग्रामीणों ने उपायुक्त से दोनों मामलों की न्यायिक और सीबीआई जांच करवाने, वर्तमान जांच अधिकारी को हटाकर किसी अन्य अधिकारी को जांच सौंपने और ग्रामीणों को पुलिस के कथित दबाव से मुक्त करवाने की मांग की। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होगा।