नोग वैली क्षेत्र में तोतों ने सेब की फसल को पहुंचाया नुकसान। संवाद
सेब बागवानों की आर्थिकी पर पक्षी और भालू बरपा रहे कहर
. दिन में तोते, रात में भालू पहुंचा रहे सेब की फसल को नुकसान
.फसलों को लगातार हो रही क्षति से नोगवैली के बागवानों की बढ़ीं दुश्वारियां
. सेब पर बढ़ते हमले के कारण समय से पहले तुड़ान करने को मजबूर बागवान
. नोगवैली, 12/20, तकलेच और दरकाली में बढ़ी समस्या, बागवान चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)।
सेब उत्पादन कर अपनी आर्थिकी चलाने वाले बागवानों पर पहले मौसम की मार पड़ी। अब पक्षियों और जानवरों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। उपमंडल रामपुर के सेब बहुल नोगवैली, 12/20 क्षेत्र, दरकाली और तकलेच समेत कई अन्य मध्यम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों पक्षी सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। दिन के समय तोतों और रात में भालू सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। तोतों और भालुओं ने बागवानों का दिन का चैन और रात की नींद हराम कर रखी है। मौसम की मार के कारण इस साल सेब की फसल बहुत कम है। साथ ही आजकल मध्यम और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन चरम पर है। मौसम की मार के चलते इस साल फसल को पूरी तरह तैयार होने में करीब एक पखवाड़े का अंतर लग रहा है। ओलावृष्टि की मार के चलते खासकर नोगवैली में सेब के दानों में न तो खास बढ़ोतरी हो पाई है और न ही समय रहते फल पर रंग आ रहा है। बारिश ने भी बागवानों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। वहीं, जंगली तोते लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में बागवानों को अधपक्के सेब को मंडियों को भेजने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यही नहीं कई क्षेत्रों में रात्रि के समय सेब के पेड़ों को जंगली भालू नुकसान पहुंचा रहे हैं। क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान पवन, गोविंद सिंह, वीरेंद्र, सुंदर सिंह, बंसी लाल, तारा चंद, सुरजीत, श्याम मुरारी, नंद लाल, कुलदीप, जगत सिंह, बुद्धि सिंह, लायक राम सहित अन्य बागवानों का कहना है कि हर साल प्रकृति की चौतरफा मार से उन्हें जूझना पड़ रहा है। सालभर की मेहनत पर पानी फिरने से बागवानों के हाथ कुछ नहीं लगता है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि सेब की फसल को तैयार करने का खर्चा भी उठाना मुश्किल हो चुका है। कृषि और बागवानी उपकरण सहित दवाइयां भी समय रहते नसीब नहीं हो पाती हैं। मजबूरन, महंगे दाम पर बाजार रेट में उपकरण और दवाएं खरीदने को बाध्य होना पड़ता है। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित बगीचों का आकलन कागजी प्रक्रिया तक ही सिमट कर रह जाता है। उन्होंने बागवानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार और बागवानी विभाग से उचित कदम उठाने की मांग की है।