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Bilaspur News: बरमाणा पीएचसी डिनोटिफाई करने पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से मांगा जवाब

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-सामाजिक संस्था ने हेल्थ सेंटर डिनोटिफाई होने के बाद दायर की थी याचिका
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बिलासपुर। प्रदेश सरकार द्वारा प्राथमिक हेल्थ सेंटर बरमाणा को डिनोटिफाई करने के बाद मदद संस्था ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी, जिसपर अब हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा है। सरकार को इसके लिए 14 मार्च तक का समय दिया गया है।
कांग्रेस सरकार की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरमाणा को बंद करने पर मदद संस्था ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। सामाजिक संस्था ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग को पार्टी बनाया है। याचिका में कहा है कि इस पीएचसी से क्षेत्र के 10 हजार लोग लाभान्वित हो रहे थे। सरकार ने हालात जाने बिना इसे डिनोटिफाई कर दिया। मदद संस्था ने याचिका दायर करते हुए पक्ष रखा था कि लोकतांत्रिक प्रणाली में सरकार लोगों के लिए होती है, लेकिन बरमाणा में चल रही पीएचसी को बंद करने के आदेश से ऐसा लगता है कि प्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस ही हैं। कोई भी लोकतांत्रिक सरकार लोगों को सुविधाएं देती है न कि छीनती है।
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ग्राम पंचायत बरमाणा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए गुग्गा मंदिर विकास समिति ने निशुल्क हाल उपलब्ध करवाया था। समिति ने एनओसी दी और डॉक्टरों व अन्य स्टाफ के बैठने की व्यवस्था अपने बजट से करवाई थी। बिजली का बिल भी समिति ही देगी, यह भी लिखित रूप में स्वीकार किया था। इसके लिए समिति का लाखों का खर्च भी आया, लेकिन नई सरकार बनते ही यह चिकित्सा संस्थान भी बंद कर दिया गया। मदद संस्था के अध्यक्ष बलराम शर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय में पहले केस नंबर सीएमपी-1058 ऑफ 2028, सीडब्ल्यूपी-521 ऑफ 2023 में जनहित याचिका दायर की थी। लेकिन अब केस का नंबर बदल दिया गया है जोकि अब सी.डब्ल्यू.पीआईएल नंबर 3/2023 है। कहा कि इस केस में अब हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थान को बंद करना सरकार की लापरवाही को दर्शाता है। संस्था इसे शुरू कराने के लिए लड़ाई लड़ेगी।
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