हाईकोर्ट ने चार साल के मासूम की हत्या के दोषी की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। रायपुर के जिला न्यायालय ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 364 और 302 के तहत दोषी ठहराया था। कोर्ट ने आरोपी को पांच साल की कैद और 500 रुपये जुर्माना, दस साल की कैद और 500 रुपये जुर्माना तथा मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान था। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दोषी की उम्र 35 साल है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में मृत्युदंड की जगह उम्रकैद की सजा पर्याप्त होगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। बता दें, कि रायपुर के उरला थाना क्षेत्र में रहने वाली पुष्पा चेतन ने 5 अप्रैल 2022 को अपने चार साल के बेटे हर्ष कुमार चेतन की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई थी। उसने बताया कि पड़ोसी पंचराम उसके दोनों बेटों दिव्यांश और हर्ष को घुमाने ले गया था।
दिव्यांश कुछ देर बाद घर लौट आया, लेकिन हर्ष को वह अपने साथ ले गया। देर रात तक हर्ष घर नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। पुलिस ने जांच में पंचराम का मोबाइल नंबर ट्रेस किया। उसकी लोकेशन नागपुर मिली। 7 अप्रैल 2022 को पुलिस ने उसे नागपुर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसने हर्ष की हत्या कर दी और शव को नेवनारा और अकोली खार के पास जला दिया। पुलिस ने 8 अप्रैल 2022 को पंचराम की निशानदेही पर अधजला शव बरामद किया। मृतक के पिता जयेन्द्र चेतन ने शव की पहचान की।
हाई कोर्ट ने पंचराम के अपराध को जघन्य मानते हुए कहा है कि उसने मासूम बच्चे की निर्ममता से हत्या की थी। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में मृत्युदंड की सजा उचित नहीं है। हमारा विचार है कि यह दुर्लभतम मामला नहीं है जिसमें मृत्युदंड की बड़ी सजा की पुष्टि की जानी है। आजीवन कारावास पूरी तरह से पर्याप्त होगा और न्याय के उद्देश्यों को पूरा करेगा।