-खानपान रखें सही, नशे से रहे दूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किशोरावस्था जीवन का वह पड़ाव है, जिसमें किशोर अपनी योग्यता को दिखाने और देश के लिए विशिष्ट कार्य करने की क्षमता रखते हैं। इस अवस्था में किशोर अपनी ऊर्जा को अगर सही दिशा में लगाएं तो वह बहुत अच्छे नागरिक बन सकते हैं। अगर उनको सही मार्गदर्शन नहीं मिला तो वह अपनी ऊर्जा को गलत दिशा में लगाकर अपने आप को दिशाहीन कर लेते हैं। यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने कही।
किशोरावस्था पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस अवस्था में कुछ लोग नशे की आदत में फंस जाते हैं। इससे वह अपना स्वास्थ्य तो बर्बाद करते हैं, लेकिन साथ ही समाज को भी गंदा करते हैं। किशोरावस्था में बच्चों को अपनी ऊर्जा को खेलकूद, पढ़ाई लिखाई, पेंटिंग, तैराकी और डांस आदि की तरफ लगाना चाहिए। इसके लिए इस उम्र में बच्चों को सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है, ताकि वह सही रास्ते से न भटके। इसी के मद्देनजर भारत सरकार ने किशोर स्वास्थ्य (कार्यक्रम) दिवस हर माह मनाने का निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम 7 जनवरी 2014 को शुरू हुआ था। उन्होंने बताया कि किशोर स्वास्थ्य के छह आयाम है। इसमें पोषण में सुधार, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार, मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि, चोट और हिंसा को रोकना, मादक पदार्थों का दुरुपयोग रोकना और गैर संक्रामक रोगों की रोकथाम करना शामिल है। किशोरावस्था में खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। संतुलित आहार के बारे में जानकारी रखना बहुत जरूरी है। बच्चे छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव में आ जाते हैं और मारना, पीटना और हिंसक आदि कार्य करते हैं। इसके लिए बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए आउटडोर खेल, ध्यान लगाना, संगीत आदि का अभ्यास करना चाहिए। साथ ही नशे से बिल्कुल दूर रहना चाहिए। इस उम्र में बच्चे काम आदि छोड़ कर जीवन में आलसी बन जाते हैं। इस कारण गैर संचारी रोग पैदा होने लग जाते हैं। इसलिए इस उम्र के बच्चों को प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी रखना बहुत जरूरी है। इस उम्र में शरीर का विकास होने के साथ बहुत सारे बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। किशोरावस्था में बच्चों को इन पहलुओं के बारे में जानकारी अति आवश्यक है तभी वह अपने आप को स्वस्थ रखेंगे।