छात्रों को कॉलेज के लिए करना होगा 20 किमी सफर, लोगों में रोष
-कॉलेज बंद करने पर लोगों में रोष,बच्चों को कॉलेज के लिए करना होगा 20 किमी सफर
-साढ़े पांच लाख का आया था फर्नीचर, दो प्रोफेसर किए थे नियुक्त, 20 थे विद्यार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं(बिलासपुर)। सरकार जनता को घर द्वार के पास सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दावे तो करती है, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने विधानसभा क्षेत्र झंडूत्ता के बल्हसीणा में चुनाव से पहले महाविद्यालय खोलने की घोषणा की थी उसके उपरांत इस कॉलेज के लिए बजट व स्टाफ का प्रावधान भी किया था। कुछ ही समय में कक्षाएं भी शुरू हो गई जिसमें 20 शिक्षार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। अब सरकार ने इस कॉलेज को बंद कर दिया है। प्रदेश सरकार के इस फैसले से ग्रामीणों में रोष है।
ग्रामीणों ने बताया कि चालू वर्ष में इस महाविद्यालय में लगभग 200 से ऊपर छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपना दाखिला लेने के लिए तैयार थे। लेकिन वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही इसको बंद कर लोगों की जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है, जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान सुखदेव, नीलम कुमारी, जितेंद्र गुलेरिया, पंचायत समिति सदस्य शेर सिंह, प्यार सिंह, राजेश कुमार, सुभाष सोनी, संतोष सिंह, रोशन लाल, श्रवण लाल, जगजीत सिंह, राजकुमार, प्रताप सिंह, बनारसी दास, कैप्टन राजेश मेहता, कैप्टन जोगिंदर सिंह, सुरेंद्र कुमार, अनूप सिंह, कर्म सिंह, धर्म सिंह, जगदेव सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जयराम सरकार ने उनके बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए घर द्वार महाविद्यालय खोला था। लेकिन अब वर्तमान सरकार ने इसको बंद कर दिया है।
उन्होंने कहा कि कॉलेज बंद कर सरकार ने उनकी समस्या को और बढ़ा दिया है। उन्होंने बताया कि अब 20 किलोमीटर दूर चकमोह, 22 किलोमीटर दूर घुमारवीं व 20 किलोमीटर दूर झंडूता में उनके बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाना पड़ेगा। घर के निकट महाविद्यालय मिलने से ग्रामीण खुश थे, लेकिन कांग्रेस ने सत्ता में आते ही कई संस्थानों को बंद कर दिया। पूर्व की सरकार ने महाविद्यालय के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की थी। इसके लिए साढ़े पांच लाख रुपये फर्नीचर के लिए भी आ चुका था। दो प्रोफेसर नियुक्त किए जा चुके थे।
वहीं झंडूता प्रधानाचार्य के पास कॉलेज का अतिरिक्त कार्यभार था। बावजूद इसके सरकार ने इस कॉलेज को बंद कर दिया। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उक्त महाविद्यालय के बंद होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी ऐसे में सरकार को भी नुकसान उठाना पड़ेगा उन्होंने महाविद्यालय को खुलवाने की मांग की है।