बिलासपुर लेखक संघ की मासिक बैठक एवं संगोष्ठी में मौजूद सदस्य और अन्य। स्रोत: संघ
बिलासपुर लेखक संघ की मासिक बैठक एवं संगोष्ठी में कहलूर की विभूतियां भाग-दो के प्रकाशन पर हुई चर्चा
अक्तूबर की बैठक गेहड़वीं के गुग्गा मंदिर में होगी
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं। बिलासपुर लेखक संघ की मासिक बैठक एवं संगोष्ठी नगर परिषद घुमारवीं के हारकुकार स्थित संतोषी माता मंदिर में हुई। कार्यक्रम की शुरुआत संघ के सदस्यों ने माता संतोषी के चरणों में शीश नवाकर की। नगर परिषद घुमारवीं के सदस्य राजेश कुमार मुख्य अतिथि रहे, जबकि अध्यक्षता डॉ. रविंद्र कुमार ठाकुर ने की। बैठक के पहले सत्र में साहित्यिक विषयों पर चर्चा की गई। संघ की ओर से प्रकाशन के लिए तैयार की जा रही पुस्तक कहलूर की विभूतियां भाग-दो को लेकर सदस्यों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। साहित्यकारों ने पुस्तक को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए। बैठक में ऑनलाइन काव्य गोष्ठियों का आयोजन जारी रखने पर भी जोर दिया गया। सदस्यों ने कहा कि ऑनलाइन गोष्ठियों के माध्यम से अधिक आयु वाले साहित्यकारों के साथ स्वास्थ्य या अन्य कारणों से कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाने वाले रचनाकारों को भी कविता पाठ का अवसर मिल सकेगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि संघ की अक्तूबर माह की मासिक बैठक गेहड़वीं स्थित गुग्गा मंदिर में होगी। बैठक के दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी हुई। इसकी अध्यक्षता शीला सिंह ने की, जबकि मंच संचालन महासचिव रविंद्र कुमार शर्मा ने किया। हेमराज शर्मा ने तेरा मेरा करते एक दिन मर जाना है कविता से शुरुआत की। मास्टर शिवाय शर्मा ने शेरांवाली कमाल कर गई, भीम सिंह नेगी ने रिश्तों और जीवन की परेशानियों पर आधारित रचना, निर्मला ठाकुर ने मैं तो फूल हूं जो हंसता और हंसाता हूं और अजय शर्मा ने मैं नन्हा सा दिया उम्मीद की लौ पर पल जाऊंगा प्रस्तुत की। केशव शर्मा ने वो झूठ भी बोल रहा था इतने अदब से, जबकि तिलक राज गौतम ने वह हाथ जो आज कांपने लगे हैं कविता सुनाई। सुनील शर्मा ने नशे के खिलाफ संदेश देती कविता नशा छोड़ो प्रस्तुत की। डॉ. अनेक राम सांख्यान ने राजभाषा को समर्पित रचना सुनाई। रविंद्र कुमार शर्मा ने संस्कारों और सिद्धांतों की जरूरत पर कविता प्रस्तुत की। बिपाशा ठाकुर ने बुजुर्ग माता-पिता को गांव में अकेला छोड़ने और नई पीढ़ी को दिए जा रहे संस्कारों पर रचना सुनाकर सामाजिक संवेदना को सामने रखा। द्वारका प्रसाद शर्मा ने जीवन के महत्व का संदेश दिया। बृजलाल लखनपाल, रेखा चंदेल और डॉ. लेख राम शर्मा ने पहाड़ी रचनाएं प्रस्तुत कर लोक संस्कृति और पहाड़ी भावनाओं को स्वर दिया। डॉ. रविंद्र कुमार ठाकुर ने अन्नदाता किसान को समर्पित कविता सुनाई।