हिमालयन नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने आरोप लगाया है कि फोरलेन सड़क निर्माण में संबंधित कंपनी ने भारी अनियमितताएं बरती हैं। बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने दावा किया कि एनजीटी द्वारा गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें कमेटी ने कहा है कि मक डंपिंग, पर्यावरण नियमों को दरकिनार करते हुए निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं हुई हैं। इसके आधार पर एनजीटी ने याचिकाकर्ता, कंपनी और सरकार से जवाब मांगा है कि क्या कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी ने समिति से भी इस बारे सुझाव मांगे हैं। गुमान सिंह ने कहा कि हिमालयन नीति अभियान यह मांग करेगी कि तमाम अनियमितताएं दूर की जाएं। कंपनी को कीरतपुर से नेरचौक तक पुन: जमीन की पैमाइश करनी चाहिए। मक डंपिंग पर हर्जाना लगाकर इसे भाखड़ा डेम को दिया जाए। जबकि वन क्षेत्र में हुई अनियमितता पर भी जुर्माना लगना चाहिए। उन्होंने सरकार से भी मांग की है कि विस्थापितों को भू अधिग्रहण अधिनियम 2014 के अनुसार चार गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए। इस मसले पर उन्होंने मुख्यमंत्री से भी उचित कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि फोरलेन सड़क निर्माण के लिए जगह-जगह बनने वाले कांप्लेक्स में विस्थापितों को दुकानें मिलनी चाहिए। यदि कंपनी उनकी इन मांगों को पूरा नहीं करती है तो वे एनजीटी में कार्य को रोकने बारे शपथ पत्र देंगे। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध और सतलुज नदी में डंपिंग की गई। पर्यावरण नियमों को भी तोड़ा गया। उस दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों ने क्यों कार्रवाई नहीं की। इसकी भी जांच की जानी चाहिए। इस अवसर पर फोरलेन विस्थापित समिति के सचिव मदन लाल भी उपस्थित रहे।