खाद वितरण की नई व्यवस्था का किया विरोध,कहा नई औपचारिकता से बढ़ी परेशानी
सरकार से ई-केवाईसी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। जिले में खाद वितरण के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य किए जाने को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। हिमाचल किसान एवं जन कल्याण सभा के प्रदेश अध्यक्ष बृज लाल शर्मा ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे किसानों के हितों के विपरीत बताया है। उन्होंने सरकार से ई-केवाईसी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने की मांग की है। बृज लाल शर्मा ने कहा कि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को नई औपचारिकताओं में उलझाया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर किसानों को सहकारी सभाओं और खाद डिपुओं से उर्वरक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और सर्वर की समस्या के कारण कई किसानों की ई-केवाईसी समय पर पूरी नहीं हो रही है, जिससे उन्हें खाद के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर होती है। यदि किसानों को समय पर खाद नहीं मिलेगी तो फसलों के उत्पादन और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों को पहले ही बढ़ती लागत, मौसम की मार और जंगली जानवरों की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में खाद जैसी आवश्यक कृषि सामग्री प्राप्त करने की प्रक्रिया को जटिल बनाना उचित नहीं है। बृज लाल शर्मा ने दावा किया कि खाद वितरण के लिए ई-केवाईसी की यह व्यवस्था फिलहाल केवल बिलासपुर जिले में लागू की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसानों पर इस तरह के नए नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने और किसानों को राहत देने की मांग की। किसान अश्वनी कुमार, सुमन भारद्वाज, राजेंद्र कुमार, रघु राम, प्रकाश चंद, लेख राम ठाकुर, सुनील कुमार और राम प्रकाश वशिष्ठ ने भी नई व्यवस्था पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए खाद वितरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। हिमाचल किसान एवं जन कल्याण सभा ने प्रदेश सरकार, कृषि विभाग और सहकारिता विभाग से ई-केवाईसी व्यवस्था की समीक्षा कर जल्द समाधान निकालने की मांग की है। सभा ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किसान संगठन इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाएंगे।