घुमारवीं (बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं के इंदिरा वार्ड में श्रीमद्भागवत महायज्ञ के पांचवें दिन कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथावाचक आचार्य अंकुश शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद वासुदेव की ओर से उन्हें गोकुल ले जाया गया, जहां नंद बाबा और माता यशोदा के घर भगवान का लालन-पालन हुआ। गोकुल पहुंचने पर पूरे गांव में उत्सव का माहौल बन गया और भगवान श्रीकृष्ण का नामकरण संस्कार बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में अनेक लीलाएं कर भक्तों को आनंदित किया और दुष्टों का विनाश कर धर्म की रक्षा की। श्रीकृष्ण ने पूतना का वध कर उसका उद्धार किया। उसके बाद तृणावर्त, अघासुर और बकासुर जैसे दैत्यों का संहार कर संसार को यह संदेश दिया कि अधर्म और अन्याय का अंत निश्चित है। माखन चोरी, गोचारण और गोपियों के साथ उनकी बाल सुलभ चंचलता का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। उन्होंने बताया कि सात साल की आयु में भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत धारण कर इंद्र के अभिमान को चूर कर दिया और भक्तों की रक्षा की।