घुमारवीं (बिलासपुर)। शिव शरण श्रीराम लंगर समिति घुमारवीं के तत्वावधान में कथा के सातवें दिन आचार्य निखिल महाराज ने श्रीराम के वन गमन और भरत मिलाप की कथा सुनाई। आचार्य ने बताया कि महाराज दशरथ ने अपने प्राणों को त्यागकर अपने कुल की मर्यादा को बनाए रखा। रघुकुल की जो रीति चली आ रही थी उस मर्यादा को खंडित नहीं होने दिया। आज का इंसान अपने थोड़े से फायदे के लिए न जाने कितने अनैतिक कार्य करता है। माता-पिता को सताता है और वृद्ध आश्रमों को बढ़ावा देता है। यदि अपने बच्चे को सुधारना हैं तो पहले हमें खुद सुधरना पड़ेगा। इस मौके पर कथा के आयोजक पंडित नरेश भारद्वाज, श्रीराम राणा, एडवोकेट संयोग कश्यप, कुलभूषण शर्मा, अरविंद महाजन, हरि राम शर्मा मौजूद रहे।