प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयनादेवी में मां के दर्शन के लिए आए एक श्रद्धालु की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। श्रद्धालु की मौत से मंदिर क्षेत्र में अव्यवस्था की पोल खुल गई है। मंदिर में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। यही नहीं रविवार होने के कारण आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी भी बंद थी। श्रद्धालु को घवांडल स्थित अस्पताल पहुंचाने में सड़क पर लगा ट्रैफिक जाम बाधा बन गया जिससे श्रद्धालु की जान नहीं बचाई जा सकी।
जानकारी के अनुसार जतिंद्र अग्रवाल (29) पुत्र विनोद अग्रवाल निवासी खमानो जिला लुधियाना पंजाब परिवार सहित मां के दर्शन के लिए आए थे। बताया जा रहा है कि जतिंद्र की आठ दिन पहले ही शादी हुई थी। मंदिर के अंदर जतिंद्र के सीने में दर्द उठा और बेसुध हो गया। मंदिर में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उसे प्राथमिक चिकित्सा के लिए स्वास्थ्य केंद्र ले जाने लगे, लेकिन रविवार होने के कारण गुफा के पास लंबा जाम लगा हुआ था।
गाड़ी को निकालते-निकालते काफी समय बीत गया। लगभग आधे घंटे के बाद जब जतिंद्र को नयना देवी के पास गांव घवांडल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया तब तक वह दम तोड़ चुका था। लोगों का कहना है कि यदि समय पर प्राथमिक चिकित्सा मिल जाती तो श्रद्धालु की जान बच सकती थी। मंदिर न्यास के अध्यक्ष हरीश गज्जू ने श्रद्धालु जतिंद्र की मौत पर गहरी संवेदना प्रकट की है। उधर, श्रद्धालु की मौत से मंदिर में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल गई है।
मंदिर के अंदर न तो यात्री को उठाने के लिए स्ट्रेचर था न ही कोई मेडिकल सुविधा न ही अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस। मंदिर न्यास ने आयुर्वेदिक अस्पताल बनाने के लिए 38 लाख रुपये दिए हैं, लेकिन ह्दय गति रुकने जैसी घटनाओं से निपटने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। इससे पहले भी मंदिर में इस तरह से श्रद्धालुओं की कई बार मौत हो चुकी है। मंदिर न्यास के अध्यक्ष हरीश गज्जू ने बताया कि बड़ी दुखद बात है कि मंदिर के पास कोई भी स्ट्रेचर नहीं है।
न्यास जल्द ही ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए स्ट्रेचर मंगवाएगा। एंबुलेंस तथा प्राथमिक चिकित्सा के लिए न्यास जल्द ही मंदिर के बाहर एक मेडिकल बूथ पर शनिवार तथा रविवार को रिटायर्ड डॉक्टर और हेल्पर की व्यवस्था करेगा।