किरतपुर नेरचौक फोरलेन सड़क से प्रभावित और विस्थापित हुए लोगों के हक की लड़ाई के लिए हिमालयन नीति अभियान से जुड़े लोग भी आगे आए हैं। हिमालयन नीति अभियान ने सड़क के निर्माण कार्य में लगी कंपनी पर विस्थापितों और प्रभावितों के हकों से खिलवाड़ करने के साथ ही नियमों को तोड़कर डंपिंग करने का भी आरोप लगाया है। इसको लेकर उन्होंने आंदोलन की भी चेतावनी दी है।
अभियान के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता में कहा कि एक स्वर में एलान किया है कि वे विस्थापितों और प्रभावितों को उनके जायज हक दिलाने के लिए दिन रात एक कर देंगे। अभियान के पर्यावरणविद एवं संयोजक श्रीधर, राम मूर्ति और गुमान सिंह ने कहा कि जब नए कानून के तहत विस्थापितों और प्रभावितों को चार गुणा मुआवजा दिया जाना है तो प्रदेश सरकार इसकी पैरवी क्यों नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। यह मुआवजा केंद्र की ओर से दिया जाना है। लेकिन, सरकार इस मामले में रुचि क्यों नहीं दिखा रही। उन्होंने कहा कि विस्थापितों को मुआवजा दिलाने की बजाए सरकार के इशारे पर जिला प्रशासन और कंपनी विस्थापितों और प्रभावितों के घरों को तोड़ने पर तुली हुई है। बिलासपुर जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें ऐसे लोगों के मकानों को निशाना बनाया गया है।
जिन्हें अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। लोगों के विरोध के बावजूद जिला प्रशासन की बल पूर्वक कार्यवाही कर रहा है। श्रीधर ने कहा कि एनजीटी में कंपनी ने केवल दस डंपिग साइटों की बात कही है जबकि अन्य 25 के लिए आवेदन का बहाना बनाया है। ऐसे में कंपनी के दावों को निरस्त करते हुए एनजीटी ने गोविंद सागर जलाशय में गिराई जा रही मिट्टी को लेकर भी रिपोर्ट मांगी है।
उन्होंने कहा कि किरतपुर से लेकर मनाली तक हालांकि लोग अपने हकों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन जब तक लोग एक मंच पर नहीं आ जाते समाधान नहीं हो पाएगा।
इस दौरान सचिव विशाल दीप, राज्य समिति सदस्य डीसी यादव, अजीत राठौर, कामरेड परवेश चंदेल, मनोज ठाकुर, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा, उपप्रधान राकेश कुमार, सुभाष, जगदीश राम, सुभाष चंद, मुंशी राम, चिंता देवी, लेखराम, श्रवण, भगत राम, मदन, महेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।