बिलासपुर।
सदर वन खंड में वन विभाग ने कागजों में लाखों रुपये के पौधे लगा कर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। इसका खुलासा विजिलेंस की जांच से हो चुका है। मामले की छानबीन के बाद विजिलेंस ने भी लाखों का फर्जीवाड़ा पाया है। इसके बाद इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
उल्लेखनीय है कि सदर वन खंड के बिनौला, मारकंड और कुड़ी आदि वन बीट में वन विभाग ने पौधरोपण किया था। लेकिन यह पौध रोपण केवल कागजों में किया गया। यहां वन विभाग ने लाखों रुपये के पौधे लगाने का दावा किया था। इसके लिए कागजों में ही लाखों रुपये खर्च भी किया गया। लेकिन जब इस पूरे मामले की जांच हुई तो जमीन पर पौधे नजर नहीं आए। इसके बाद मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई। विजिलेंस ने इस मामले की जांच में पाया कि पौधे तो केवल कागजों में ही लगे हैं। इसके बाद पूरा मामला साक्ष्यों के साथ राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा गया। जहां से सरकार ने भी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके बाद विजिलेंस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले में वन विभाग के कई आला अधिकारी लपेटे में आएंगे। सूत्रों की मानें तो इसकी आंच तत्कालीन डीएफओ पर भी पड़ सकती है। जबकि आरओ, बीओ और गार्ड पर भी इस मामले की गाज गिरना लगभग तय है।
इधर, इस मामले में डीएसपी विजिलेंस बिलासपुर संजीव भाटिया का कहना है कि जांच में पाया गया है कि मौके पर पौधे नहीं लगाए गए हैं। इसके बाद इस मामले में विजिलेंस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है। उन्होंने कहा कि इस मामले में वन विभाग के कई अधिकारी लपेटे में आएंगे।
मजदूरों से करवाते हैं पौध रोपण
पौध रोपण वन विभाग का मौसमी कार्य है। इसे बरसात में किया जाता है। इस कार्य को पूरा करने के लिए अस्थाई रूप से लेबर लगाई जाती है। जो बरसात के मौसम में पौध रोपण करती है। मजदूरों को वन विभाग की नर्सरी से पौधे लेकर चयन की हुई जमीन पर पौध रोपण किया जाता है।
अधिकारी देते हैं पौध रोपण की मंजूरी
पौध रोपण के लिए वन विभाग के उच्च अधिकारी स्थान का निरीक्षण करते हैं। इसके बाद पौध रोपण के लिए स्थान तय होता है। पौध रोपण की मंजूरी डीएफओ या उससे उच्च अधिकारी देता है।
काम के लिए ये अधिकारी जिम्मेदार
पौध रोपण का पूरा कार्य बीट गार्ड की देख-रेख में होता है। इसके बाद वन खंड अधिकारी पैमाइश का कार्य करता है। पूरे कार्य की वैरीफिकेशन रेंज अधिकारी करता है। इस कार्य का बीच में डीएफओ भी निरीक्षण करता है। बाद में पूरे बिल डीएफओ पास करता है। पैसा रेंज अधिकारी के नाम आता है जो आगे काम करने वालों में पैसे का वितरण करता है।