बिलासपुर। बिलासपुर शहर से 300 से ज्यादा अवैध कब्जों को आखिर कौन हटाएगा। नगर परिषद बिलासपुर और राजस्व विभाग एक-दूसरे के पाले में इस जिम्मेवारी को डाल रहे हैं। जबकि हाईकोर्ट ने इसी माह के अंत तक अवैध कब्जों को हटाकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। ऐसे में स्थिति यह पैदा हो गई है कि अवैध कब्जे हटेंगे भी या नहीं या फिर अधिकारियों पर इस लापरवाही की गाज गिरेगी। बहरहाल अभी अवैध कब्जों को हटाने के लिए कोर्ट का दिया हुआ समय पूरा नहीं हुआ है। अब समय पूरा होने के बाद ही इसका पत चल पाएगा।
बिलासपुर शहर विस्थापितों का शहर है। भाखड़ा बांध बनने के बाद नया शहर बसाया गया था। डैम बनने के बाद विस्थापित हुए लोगों को शहर में एक-एक प्लाट दिए गए थे। कइयों ने अवैध तरीके से अपने कब्जे बढ़ा लिए। हाल ही में सरकार ने 150 वर्ग मीटर के कब्जों को नियमित करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत अवैध कब्जों को छुड़वाया जाना था। इसके अलावा हाईकोर्ट ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय प्रशासन व नगर परिषद को आदेश दिए थे कि अवैध कब्जों को हटाया जाए। कोर्ट ने इसी माह की अंतिम तारीख तक जिला में 300 से ज्यादा चिह्नित अवैध कब्जों को हटाने को कहा है। इनकी लिस्ट नगर परिषद ने जमा करवाई थी।
विडंबना यह है कि नगर परिषद अब राजस्व विभाग के सिर इस जिम्मेवारी को डाल रही है। जबकि राजस्व विभाग नगर परिषद को अवैध कब्जे हटाने के लिए कह रहा है। दोनों का ही अलग-अलग तर्क है। जबकि अवैध कब्जों को हटाने की समय अवधि समाप्त होती जा रही है। कहीं ऐेसा न हो कि एक दूसरे के पाले में जिम्मेवारी सौंपने के चक्कर में अधिकारियों पर कोर्ट की नाराजगी की गाज गिर जाए। सरकाघाट में भी कोर्ट के आदेशों की अनुपालना न करने पर पांच अफसरों को कोर्ट ने तलब किया है। ऐसे में अगर समय रहते कब्जे नहीं हटाए गए तो यहां पर भी इस तरह की गाज गिर सकती है।
एसडीएम सदर डॉ. हरीश गज्जू का कहना है कि नगर परिषद की अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेवारी है। अगर कानून व्यवस्था के लिए मदद मांगते हैं, तो पुलिस कर्मचारी व अन्य सुविधाएं नियमानुसार उपलब्ध करवाई जाएंगी।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी केआर ठाकुर ने कहा कि अवैध कब्जों पर कार्रवाई करना राजस्व विभाग का कार्य है। कहां-कहां अवैध कब्जा है इस बारे राजस्व विभाग ही बताएगा, जिस पर कार्रवाई की जाएगी।