अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। हिमाचल सरकार की ओर से शिशु प्रमाण पत्र बनाने के लिए नि:शुल्क सुविधा मुहैया करवाई गई है लेकिन बिलासपुर के साथ लगती चांदपुर पंचायत का सचिव शिशु प्रमाण पत्र बनाने के लिए 235 रुपये की मांग करता है। इस बात का खुलासा चांदपुर में स्थित एक निजी अस्पताल के मालिक की ओर से बनाई गई वीडियो में हुआ है।
वीडियो में पंचायत सचिव शिशु प्रमाण पत्र बनाने के लिए पैसों की मांग करता है। इस दौरान जब व्यक्ति पैसा देने की आनाकानी करता है तो सचिव उसका प्रमाण पत्र नहीं बनाता है। साथ ही पंचायत का कार्य करने के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर मुहैया करवाने की मांग करता है। यह वीडियो आजकल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ है।
बता दें कि चांदपुर में स्थित निजी अस्पताल में होने वाले शिशु का रिकॉर्ड सबसे पहले वहीं की पंचायत में नियमानुसार दर्ज होता है, लेकिन निजी अस्पताल के मालिक की ओर से आरोप लगाया कि उक्त पंचायत सचिव नवजात शिशुओं के नाम दर्ज करने के लिए आनाकानी करता हैं। वायरल वीडियो में सचिव उस व्यक्ति से डाटा एंट्री आपरेटर खुद का लाने की भी बात कर रहा है। हैरानी की बात है कि यदि निजी काम करवाने के लिए स्वयं का डाटा एंट्री ऑपरेटर से पंचायत कार्यालय में जाकर सरकार के कंप्यूटर पर काम करवाया जाए तो सिस्टम की क्या विश्वसनीयता रह जाएगी। सचिव जहां उस व्यक्ति ने लिखित तौर पर डाटा एंट्री आपरेटर को मुहैया करवाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरा व्यक्ति सरकार के काम का हवाला दे रहा है। वहीं पंचायत सचिव ने स्वीकारा कि वे एक शिशु जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के 235 रुपये लेते हैं जिस पर सचिव इस राशि के लेने के लिए ग्राम सभा के प्रस्ताव का हवाला दे रहे हैं। इस सारे प्रकरण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
इनसेट...
वायरल वीडियो की नहीं कोई जानकारी
जिला परिषद अध्यक्ष अमरजीत सिंह बग्गा का कहना है कि शिशु प्रमाण पत्र नार्मिल चार्ज लिए जाते हैं। सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुआ है इसकी कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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मामले की जांच की जाएगी
मामला ध्यान में नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच की जाएगी।
उपायुक्त, विवेक भाटिया, बिलासपुर
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