बरठीं (बिलासपुर)। विकास खंड झंडूता के तहत खड्डों में अवैध खनन जोरों से हो रहा है। खड्डों में अवैध खनन को रोकने के दावे जमीनी स्तर पर हवा होते नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ एक सालों में तो खड्डों में जलस्तर इस कदर गिर चुका है कि कई योजनाएं तो बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
खड्डों के साथ लगती किसानों की जमीन भी बंजर होती जा रही है। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। आने वाली गर्मी के मौसम में सूखा पड़ने की चिंता विभाग के अधिकारियों को सता रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन व सरकार ने अवैध खनन माफिया पर शिकंजा नहीं कसा तो पूरा इलाका सूखे की चपेट में आ जाएगा।
विकास खंड झंडूता के तहत आने वाली सुन्हाणी, री, झरेड़ी, अमरोआ, बैहरन, तुंगडी, पिपलूघाट व शुक्र खड्ड में अवैध खनन जोरों से चल रहा है। प्रशासन व विभाग के अवैध खनन को रोकने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। लगभग दो वर्ष पूर्व जिला प्रशासन की ओर से उपमंडलाधिकारी घुमारवीं के आदेशानुसार खड्डों के लिए जाने वाले रास्तों को बंद करने का अभियान चलाया गया था। इसके तहत खड्डों की ओर जाने वाले ट्रैक्टरों के रास्तों को जेसीबी के माध्यम से बंद कर दिया गया था। इसका असर भी दिखने को मिला था, लेकिन अब पुन: खनन माफिया खड्डों का सीना छलनी कर रेता, बजरी व पत्थरों को अवैध रूप से ले जाने में जुटे हुए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले यह खनन रात के अंधेरे में किया जाता था, लेकिन विभाग के सुस्त रवैये के कारण यह धंधा दिन में भी खूब फल फूल रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन व विभाग से आग्रह किया है कि जो भी खड्डों की ओर जाने वाले रास्ते हैं उन सभी को बंद किया जाए। अवैध खनन से सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
थाना प्रभारी तलाई श्याम प्रसाद भारद्वाज ने बताया कि अवैध खनन के चलते चालू वर्ष में लगभग 70 ट्रैक्टरों पर कार्रवाई कर लगभग साढ़े तीन लाख रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले हैं। यह कार्रवाई लगातार जारी है। माइनिंग एक्ट के तहत चालान बुकें लोनिवि, जंगलात, सिंचाई विभाग व माइनिंग अधिकारियों के पास भी हैं, लेकिन माइनिंग के अलावा कोई भी विभाग कार्रवाई करने से गुरेज करते हैं। यदि सभी विभाग मुस्तैदी से कार्य करें तो खनन माफियाओं का यह धंधा बंद हो सकता है।