-बच्चों को स्तनपान न कराने वाली महिलाओं में होता है डिप्रेशन का खतरा
- मां का दूध शिशु के लिए अमृत समान,रोग से लड़ने की देता है ताकत
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला(बिलासपुर)। विश्व स्तनपान दिवस सप्ताह के अंतर्गत जागरूकता शिविर स्वास्थ्य खंड मार्कंडेय के आंगनबाड़ी केंद्र गसौड़ में किया गया। इसमें स्वास्थ्य शिक्षकों ने कई अहम जानकारी महिलाओं के साथ साझा की।
स्वास्थ्य शिक्षक विजय कुमारी ने विश्व स्तनपान सप्ताह 2023 की थीम स्तनपान को सक्षम बनाना, कामकाजी माता के लिए फर्क करना आदि पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि आपने अकसर लोगों को यह बात कहते हुए सुना होगा कि मां का दूध शिशु के लिए अमृत समान होता है। मां का दूध पीने से शिशु को रोगों से लड़ने की क्षमता मिलती है और वह स्वस्थ बना रहता है। कहा कि स्तनपान कराने से न सिर्फ शिशु को बल्कि मां को भी सेहत से जुड़े कई फायदे मिलते हैं। ब्रेस्टफीडिंग केवल बच्चे के आहार के लिए जरूरी नहीं होता है। इससे नवजात को शुरुआती छह महीनों तक सारे जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं। मां का दूध पीने से बच्चे को बीमारियों से लड़ने में भी मदद मिलती है। मां के दूध में उच्च प्रोटीन और रोगप्रतिकारक मौजूद होते हैं जो शिशु की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। विटामिन ए एवं एंटी बॉडी युक्त कोलोस्ट्रम, नवजात शिशुओं की जरूरतों के लिए अनुकूल रूप से विकास में मदद करता है। मां के दूध में मौजूद प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम आदि तत्व शिशु के शारीरिक विकास में मदद करते हैं।
बच्चे के जन्म के बाद से ही मां को ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है। इसकी वजह से महिलाओं को पेट दर्द की समस्या का भी सामना करना पड़ता है। वहीं, अगर महिला अपने बच्चे को नियमित रूप से स्तनपान कराती है तो ऐसे में उसे ब्लीडिंग के कारण होने वाले दर्द से तो राहत मिलती ही है साथ ही ब्लीडिंग भी कम होती है। उन्होंने कहा कि कई शोध में यह बात सामने आई है कि जिन माताओं ने जल्दी ही अपने बच्चों को अपना दूध पिलाना बंद किया, उनमें डिप्रेशन होने का खतरा ज्यादा रहा, जबकि कई महिलाओं ने ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान तनाव घटने की बात स्वीकार की। दरअसल, ब्रेस्टफीडिंग से ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है जो रिलैक्स होने और तनाव घटाने के लिए जाना जाता है।