बिलासपुर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन उपस्थित श्रद्धालु । संवाद
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा हुई संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर के डियारा सेक्टर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा वीरवार को संपन्न हो गई। कथा के अंतिम दिन कथावाचक पुनीत शर्मा ने कहा कि महाशिवरात्रि को यदि कोई भी जीव अनायास ही व्रत करता है तो उसे निश्चित तौर पर उसका फल मिलता है। उन्होंने शिवरात्रि की महिमा और शिवलिगों की स्थापना पर रोचक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सृष्टि के आदि काल में ब्रह्मा और विष्णु आपस में युद्ध करने लगे। इस दौरान दोनों के बीच में कीर्तिमान स्तंभ के रूप में भगवान शिव शंकर प्रकट हुए। इस स्तंभ की खोज करने को ब्रह्मा हंस बनकर स्वर्ग चले गए और विष्णु भी अन्य रूप धारण कर पाताल चले गए। सैकड़ों साल तक इन दोनों ने वहां घोर तपस्या की। लेकिन वहां पर कोई उन्हें न आरंभ मिला और न ही आदि। फिर दोनों स्तंभ स्थान पर आ गए। इस दौरान ब्रह्मा ने झूठ कहा कि उन्होंने इसका अंत पा लिया है। इतने में स्तंभ फाड़कर महादेव शंकर प्रकट हुए। उन्होंने ब्रह्मा को झूठ बोलने पर उनका एक सिर काट दिया। शंकर का रौद्र रूप एवं क्रोध को देखकर ब्रह्मा विष्णु ने प्रार्थना की और शंकर पिंडी रूप बन गए। शंकर भगवान ने कहा कि आज का दिन शिवरात्रि से प्रख्यात होगा और लोग शिवलिंग की पूजा करेंगे। उस दिन से महाशिवरात्रि का पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। कथावाचक ने बताया कि जीवन की महान सच्चाई मौत है, उसे सुधारना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जो जीव इस दुनिया में आया है उसका जाना तय है। इसलिए जीवन की सीढ़ी में भगवान का नाम लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाग दौड़ की दुनिया में जीव केवल अपने तक ही सीमित रह गया है, लेकिन कुछ क्षण भगवान के सुमिरन में भी लगाने चाहिए ताकि यह लोक और परलोक दोनों में सुधार हो जाए। कथा समापन पर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। बाद में अटूट भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।