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Bilaspur News: जंग विकास को करती है नष्ट... से दिया शांति का संदेश

Mon, 15 Jul 2024 11:42 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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लेखक संघ की मासिक बैठक में कवियों ने जमाया रंग, प्रस्तुत की अनेकों रचनाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लेखक संघ की मासिक बैठक एवं संगोष्ठी कोलका गांव में डॉ. लेख राम शर्मा के घर पर हुई। इसमें हिमाचल संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. केशवानंद कौशल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रविंद्र ठाकुर ने की। साहित्यकारों ने प्रदेश के जाने माने साहित्यकार मनशा राम अरुण के निधन पर शोक प्रकट किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार नरैनू राम हितैषी ने की। सबसे पहले मास्टर शिवाय ने अपनी रचना टिल्लू जी स्कूल आए, प्रीति शर्मा ने कहना किसी का, लड़कियों कि मैं हूं ना... प्रस्तुत की। प्रवीण शर्मा ने पर्यावरण का संरक्षण, हेमराज शर्मा ने जिंदगी की न टूटे लड़ी, ऊं जप ले घड़ी दो घड़ी, डॉ. जय महलवाल ने लगिरी थी दंदा बड़ी भारी पीड़, रविंद्र चंदेल कमल ने जनता ने स्वीकारा था जिनको, ईमान अपना बेच दिया, रूप शर्मा ने जंग विकास को नष्ट करती है रचना प्रस्तुत की। डॉ. केशवानंद कौशल ने आज नूतन की बेला है, दिल में कुछ कुछ होता है, रविंद्र कुमार शर्मा ने शहर तो सारे भर गए मित्रों, खाली हो गए अब तो गांव, पेट की खातिर दर-दर भटका, छाले पड़ गए मेरे पांव, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने गुजरी हुई उम्र के कुछ लम्हे, अभी भी याद हैं, कुछ साथी गुजर गए हैं, कुछ अभी आवाद है प्रस्तुत की। डॉ. रविंद्र ठाकुर ने बड़ा बुरा जमाना आया लोको, दसा कन्या किता ते पुजणिया, आद राम सांख्यान ने माणुयें रे मनां च हलचल, दिला च खलबल प्रस्तुत की। जसवंत सिंह चंदेल ने वोटर तू वोट कर, कर्ण चंदेल ने मैं तन्हा ही था और तन्हाई मेरी, डॉ. अनेक राम संख्यान ने काली घटाएं अब छाई, पावन प्रेम की रुत आई, बृजलाल लखनपाल ने होशियार गीदड़ प्रस्तुत की। द्वारिका प्रसाद शर्मा ने पहला सुख निरोगी काया, डॉ. एल आर शर्मा ने जंगल सब कट रहे विकास की बयार में, जल स्रोत सब सूख रहे पेड़ों के अभाव में प्रस्तुत की। एन आर हितेषी ने एक हवलदार ने अपनी बीती बात हमें बताई, उसी थाने में तैनात थी उसकी पत्नी बतौर सिपाही प्रस्तुत कर लोगों को खूब हसाया। केशव शर्मा ने सर झुकाने को ही मैं बंदगी समझता रहा, रविंद्र शर्मा ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम रूप शर्मा ने जंग विकास को नष्ट करती है, कृष्ण चंद महादेविया ने रंगीन वादियों में दिल लगता नहीं है, किसे सुनाएं हाल हमदम मिलता नहीं है, रविंद्र साथी ने चिडनू चूड़दे सैर सुक्की, पुराने रीति रिवाज गए लुखी, डॉ. प्रकाश चंद ने तांजे टिहगा पर जां ध्याड़ा, तां देखणे रा छैल लगां नजारा प्रस्तुत की। वीणा वर्धन ने काश इंसान को इंसान से प्यार हो जाए, रचना चंदेल ने याचना नहीं अब रण होगा, रेखा चंदेल ने नीली नीली घोड़ी हो कुथू ओ चुगे रचना सुनाई। ममता कुमारी चंदेल ने कुछ लोग, सुरजीत चंदेल ने गल मेरी मनी जाया कर, शीला सिंह ने फोरलेन आई गई, चार पासे पाई गई सडकां रा जाल, भीम सिंह नेगी ने जिस घर आपकी सेवा सत्कार, संजीवनी है वह परिवार, संसार चंद कुटलैहडय़िा ने कहां से तू आया बंदे प्रस्तुत की। कार्यक्रम में जबड़ी माता मंदिर के महंत बाबा रूपेश्वर गिरी, डॉ. लेखराम शर्मा, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल, डॉ. गंगा राम, कृष्ण चंद महादेविया, रवींद्र कुमार शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।
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