छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे भीमेश्वर रवि को बरी कर दिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने निर्णय में कहा कि निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि केवल मृतक के मृत्युकालिक कथन पर आधारित थी। इसे एक घातक प्रक्रियात्मक चूक के कारण बरकरार नहीं रखा जा सकता। दरअसल, बयान दर्ज करते समय पीड़िता को मानसिक रूप से स्वस्थ होने की पुष्टि करने वाले डॉक्टर का स्पष्ट प्रमाण पत्र नहीं था।
न्यायालय ने माना कि इस चूक ने एक महत्वपूर्ण संदेह पैदा किया, जिससे दोषसिद्धि को बनाए रखना संभव नहीं था। अपने फैसले में, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भविष्य में ऐसी जांच संबंधी विफलताओं को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए।
बता दें कि भीमेश्वर उर्फ रवि पर आरोप था कि उसने अपनी पत्नी लक्ष्मी बाई पर अपने गृह ग्राम बरही में मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। लक्ष्मी बाई गंभीर रूप से झुलस गई। 5 मई, 2019 को डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल रायपुर में उसकी मृत्यु हो गई। लक्ष्मी बाई का मृत्युकालिक कथन दर्ज करने सहित जांच के बाद, बालोद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ धारा 302 के तहत आरोप पत्र दायर किया। 9 जून, 2022 को प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बालोद ने आरोपी को दोषी पाया और उसे आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को पति ने हाईकोर्ट के समक्ष आपराधिक अपील में चुनौती दी।
अपीलकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया था और घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। अपीलकर्ता स्वयं पत्नी को अस्पताल ले गया था।मृत्युकालिक कथन को चुनौती देते हुए वकील ने कहा कि यह अविश्वसनीय था क्योंकि इस मामले में डॉक्टर का कोई प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था जो यह बताता हो कि मृतक अपना मृत्युकालिक कथन देने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ अवस्था में थी।अपने बयान में, अपीलकर्ता ने कहा था कि यह एक दुर्घटना थी। उसने दावा किया कि उसकी पत्नी ने शराब पी रखी थी। घर में बिजली नहीं होने के कारण उन्होंने मोमबत्ती जलाई , जिससे उसकी साड़ी में गलती से आग लग गई।