बिलासपुर। घुमारवीं थाना के तहत हवाण में रास्ता रोककर मारपीट, धमकी और एससी-एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने 65 वर्षीय महिला को जमानत दे दी है। अदालत ने माना कि महिला करीब तीन महीने पहले ही जांच में शामिल हो चुकी थी और गिरफ्तारी के बाद उससे कोई बरामदगी नहीं होनी है। इसके अलावा मामले की जांच भी काफी हद तक पूरी हो चुकी है। अदालत ने महिला होने और उसकी उम्र को भी जमानत देने के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार माना। अदालत ने केस रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि मामले में गवाहों की ओर से दिए गए शुरुआती बयानों में महिला का नाम नहीं था। बाद में दर्ज किए गए पूरक बयानों में उसका नाम शामिल किया गया। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों से मौके पर महिला की ओर से निभाई गई भूमिका स्पष्ट नहीं होती। पुलिस ने 7 जून 2026 को हवान में रास्ता रोकने, मारपीट, धमकी, गाली-गलौज और धार्मिक स्थल पर कथित तौर पर जबरन ले जाने के आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। अभियोजन के अनुसार एक व्यक्ति को ऊंचाई से धक्का देने का भी आरोप सामने आया था। जांच के दौरान पुलिस ने घायलों के मेडिकल करवाए थे। अभियोजन के अनुसार एक घायल के सिर पर चोटें आई थीं। मेडिकल राय में करीब 120 फीट ऊंचे ढलान से गिरने पर गंभीर चोट अथवा मौत होने की संभावना जताई गई थी। इसी आधार पर जांच के दौरान गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। अदालत ने महिला को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर रिहा करने के आदेश दिए। उसे जांच में सहयोग करने और अदालत की प्रत्येक तारीख पर पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। समान गतिविधि में दोबारा संलिप्त पाए जाने पर जमानत रद्द की जा सकती है।