रेशम कीट रोग, कोकून की छंटाई, प्रबंधन की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी/बिलासपुर। रेशम विभाग और केंद्रीय रेशम बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में रेशम केंद्र पडयालग में किसानों को एक दिवसीय रेशम कीट पालन का प्रशिक्षण दिया गया। किसानों को रेशम कीट पालन, कीट रोग, कोकून की छंटाई और प्रबंधन आदि की जानकारी दी गई।रेशम विभाग की विकास अधिकारी वंदना शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम किसानों की जागरुकता के लिए चलाए जा रहे हैं। इसमें रेशम कीट पालन संबंधित विभिन्न जानकारियां किसानों को दी जा रही हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन सीएसआर एंड टीई योजना के तहत पडयालग और इसके आसपास के क्षेत्र के किसानों के लिए किया गया। उन्होंने किसानों को रेशम कीट के जीवन चक्र, रेशम उत्पादन और शहतूत पौधों आदि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कीटों के लिए उपयुक्त पत्तों का चयन, बीज मात्रा के अनुसार स्थान योजना, कीट पालन कक्ष की कीटाणुनाशक सफाई, सही ढंग से खाना देना व सफाई, कीटों को कताई के लिए चुनना, कोकून की कटाई, छंटाई और सुखाने की विधि पर चर्चा की। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वह ज्यादा से ज्यादा संख्या में रेशम कीट पालन से जुड़ें और अपनी आजीविका को सुदृढ़ बनाएं। केंद्रीय रेशम बोर्ड की वैज्ञानिक डॉ. रीता सिंह ने किसानों को रेशम कीटों से संबंधित बीमारियों, कीट संक्रमण और उनके प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी। रेशम कीटों में फैलने वाले सामान्य रोगों जैसे ग्रॉसेरी फ्लाचरी, मस्कार्डिन आदि के लक्षणों, कारणों और रोकथाम के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। रेशम निरीक्षक अंकित कुमार ने किसानों को शहतूत के पौधों की किस्म, उन्हें लगाने के तरीकों और बीमारियों की जानकारी साझा की। इस अवसर पर रेशम केंद्र पटियाला के प्रभारी बलवंत सिंह ने लोगों की समस्याओं को भी सुलझाया।