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रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचने के लिए प्राकृतिक खेती बेहतर विकल्प : डॉ. मनप्रीत

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कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन
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जिले के 36 क्लस्टरों के 36 किसानों ने लिया भाग

संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुक्रवार को समापन हुआ। इसमें जिले के 36 क्लस्टर से 36 किसानों ने भाग लिया। शिविर में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण संचालक डॉ. गौरव ने बताया कि शिविर भारत सरकार के राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत लगाया गया। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी सीमा शाह और डॉ. मनप्रीत कौर ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि रसायनों के अत्यधिक और अनियंत्रित प्रयोग से कृषि भूमि और वातावरण प्रदूषित हो रहा है। यह हमारे स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है, जिससे मानव स्वास्थ्य की चिंता बढ़ रही है। रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचने के लिए प्राकृतिक खेती एक अच्छा विकल्प है। जिस तरह हम सुन रहे हैं कि हिमाचल में कैंसर आदि की बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं, इससे बचने के लिए प्राकृतिक खेती एक अच्छा विकल्प है। डॉ. गौरव ने बताया कि प्राकृतिक खेती का मूल रूप हमारी मिट्टी को ऑर्गेनिक कार्बन से भरपूर करना है। ऑर्गेनिक कार्बन हमारी उपजाऊ क्षमता को बढ़ाता है और यह किसी भी मिट्टी की रीड की हड्डी के समान होता है। प्राकृतिक खेती में हम जीवाणुओं की संख्या बढ़ाने और ऑर्गेनिक कार्बन के ऊपर ही काम करते हैं। डॉ. मनप्रीत कौर ने सब्जियों में किस तरह से प्राकृतिक खेती को किया जा सकता है, इसके बारे में विस्तार से बताया। शिविर में विशेषज्ञों को भी बुलाया गया और पशुपालन और प्राकृतिक खेती की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में जुड़े प्रतिभागी कृषि सखी और सीआरपी क्लस्टर से जुड़े किसानों को प्रशिक्षण देंगे और उनकी प्राकृतिक खेती की निगरानी करेंगे।
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