बिलासपुर। शहर स्थित सांस्कृतिक विभाग के ऑडिटोरियम में चल रहे राज्यस्तरीय नाट्य उत्सव के तीसरे दिन बिलासपुर के कलाकारों ने ऐतिहासिक मोहना नाटक का मंचन किया। नाटक में कहलूर रियासत के राजा विजय चंद के समय एक सीधे-साधे युवक मोहन को फांसी देने की कहानी दिखाई गई। मोहना घुमारवीं के रंडोह गांव का रहने वाला था। दरअसल उसका बड़ा भाई तुलसी राजा के पास नौकर था। जमीन के आपसी झगड़े में उसका अपने पड़ोसी मसद्दी हवलदार के साथ झगड़ा रहता था। एक दिन दांव लगाकर उसने मसद्दी को मार दिया और उसकी लाश वहीं खेतों में पत्थरों के नीचे दबा दी। मसद्दी कहां गया कोई पता नहीं। कुछ दिनों बाद उसकी लाश जहां दबाई गई थी, वहां पर कौए आदि मंडराने लगे। जब लोगों ने देखा तो वहां उन्हें मसद्दी हवलदार की लाश मिली। राजा के मुखबिर जासूसों ने बता दिया कि इसे तुलसी ने मारा है। उधर, तुलसी ने अपने छोटे भाई मोहन को विश्वास में लेकर कह दिया कि वह इस हत्या की जिम्मेवारी अपने ऊपर ले ले। वह राजा का मुंह लग है। उसे छुड़ा देगा। मोहना सीधा-साधा मान गया। राजा ने उसे बहुत समझाया ,बहुत समझाया, थानेदार रामदित्ता मल ने समझाया, लेकिन वह नहीं माना। उसने कहा कि उसी ने उसकी हत्या की है। आखिर राजा ने उसे फांसी की सजा सुना दी। फांसी पुराने बिलासपुर के बेड़ीघाट में हुई थी। जब मोहन को फांसी पर लटका दिया गया तो लोक कवि मुखर हो गया। उसके मुंह से निकला आया मरना ओ मोहना आया मरना पाईए री कित्तियां आया मरना। लोग उसी समय यह गाते हुए चले गए थे। नाटक के कलाकारों में नवीन सोनी, अभिषेक सोनी,वर्षा शर्मा, श्रृष्टि कालिया, पारुल चौहान, दाक्षी, अश्विका ठाकुर, महक चौहान, निखिल चौधरी, उस्मान शेख, निखिल चौहान, ईशान गौतम, निशांत रघु, मिलाप शर्मा, विक्रांत परमार, प्रिंस शर्मा, शिवम कौशल रहे। नाटक में संगीत धीरज शर्मा ने दिया। मंच सज्जा नवीन सोनी, निखिल वर्षा ने किया।