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ऑर्गेनिक खेती अपनाकर खुद को आत्मनिर्भर बना सकती हैं महिलाएं

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बिलासपुर। महिलाओं को आत्मसम्मान की जिंदगी जीने के लिए आत्मनिर्भर होना जरूरी है। ग्रामीण महिलाओं को ऑर्गेनिक खेतीबाड़ी करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उत्पादों को बाजार में पहुंचाने के लिए उत्पाद समूहों का गठन किया जा रहा है। विकास खंड सदर में अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में मुख्यातिथि ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) एग्जीक्यूटिव अपूर्वा ने महिलाओं को जागरूक किया। कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम प्रबंधक एनआरएलएम देशराज विशेष अतिथि मौजूद रहे।
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महिला स्वावलंबन को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की योजनाओं से आर्थिकी सुदृढ़ करने की जानकारी दी गई। अपूर्वा ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के तहत सरकार महिलाओं को स्वावलंबी बनाने पर जोर दे रही है। स्वयं सहायता समूहों, विलेज ऑर्गेनाइजेशन, क्लस्टर लेवल फेडरेशन के प्रोड्यूसर ग्रुप बनाने के सरकार ने निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूहों को ऑर्गेनिक खेतीबाड़ी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। महिलाओं को न सिर्फ ऑर्गेनिक खेती के तरीके बताए जाएंगे बल्कि उत्पाद बाजार तक पहुंचाए जाएंगे। उत्पाद समूह शुरू करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की तरफ से डेढ़ लाख की ग्रांट दी जाती है। इस मौके पर गोविंद सीएलएफ की प्रधान निर्मला धीमान, महासचिव निशा चंदेल, सदस्य बबली शर्मा, क्षेत्रीय कोऑर्डिनेटर सोनू, लैस ड्रीम फाउंडेशन के धर्मेंद्र और 11 पंचायतों के क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) की पदाधिकारी मौजूद रहीं।
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योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं बनें सशक्त
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं शुरू की गई हैं। सेल्फ हेल्प ग्रुप से लेकर सीएलएफ तक के समूह गठित कर महिलाएं कार्य कर रही हैं। अपने साथ अन्य लोगों की आर्थिकी को भी सुदृढ़ कर रही हैं। महिलाएं सुदृढ़ हों इसके लिए योजनाओं की जानकारी होना जरूरी है, तभी इनका लाभ उठा सकती हैं।
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निर्मल शर्मा, महिला सामाजिक शिक्षा आयोजक
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जलजलित रोगों से बचाव की दी जानकारी
महिलाओं को हृदयाघात, सर्पदंश और जलजनित रोगों से बचाव के बारे में जानकारी दी। सहारा, आयुष्मान योजनाओं के बारे में जागरूक किया। उन्होंने अपराजिता कार्यक्रम की भी सराहना की।
मस्तराम, स्वास्थ्य शिक्षक
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महिलाएं खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाओं का लाभ उठाएं। जब तक स्वयं सहायता समूह को ग्राम संगठनों से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक कोई ग्रांट एनआरएलएम से नहीं मिलती।
देशराज, जिला कार्यक्रम प्रबंधक एनआरएलएम
महिलाओं को अधिकारों की होनी चाहिए जानकारी
महिलाओं को बराबर का दर्जा देने की बात तो होती है, लेकिन आज भी कई महिलाएं हर क्षेत्र में अपना योगदान देने के बाद भी गुमनामी की जिंदगी जीती हैं। महिलाओं को अपने अधिकारों को समझना होगा।
निर्मला धीमान, प्रधान, गोविंद सीएलएफ
अधिकारों की जानकारी से आते हैं जिंदगी में बदलाव
अपराजिता जैसे कार्यक्रम महिलाओं को अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जानकारी मिलती है जो उनकी जिंदगी में बड़े बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होते हैं। कार्यक्रम में जो जानकारी मिली उसे अन्य महिलाओं तक पहुंचाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करूंगी।
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निशा चंदेल, महासचिव, गोविंद सीएलएफ

बीडीओ कार्यालय बिलासपुर में अपराजिता कार्यक्रम में उपस्थित महिलाएं। संवाद- फोटो : BILASPUR

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