बरठीं (बिलासपुर)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बरठीं में शनिवार दोपहर करीब दो बजे हुए भूकंप के झटकों से जमीन थर्रा उठी। स्कूल में अचानक अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए विद्यार्थी और शिक्षक डेस्क और टेबल के नीचे छुप गए। चौंकिए मत, यह सत्य नहीं बल्कि स्कूल में आपदा प्रबंधन के तहत आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मॉक ड्रिल में प्रशिक्षण प्राप्त प्रवक्ता (भूगोल) संतोष कुमारी द्वारा सुनियोजित ढंग से तैयार करवाए गए मॉक ड्रिल अभ्यास की बारीकियों को बच्चों व अध्यापकों के साथ सांझा किया गया। पहले से तय प्रोग्राम के अनुसार सबसे पहले दो बजे स्कूल में हूटर बजते ही बच्चे डेस्क के नीचे छिप गए, जबकि दूसरे हूटर पर सभी बच्चे अपने-अपने स्कूल बैग सिर पर रखकर खुले मैदान में आ गए। थोड़ी ही देर में भूकंप के झटकों से इमारत के भीतर घायल हुए बच्चों को बाहर निकालने का अभ्यास किया गया। घायलों को बच्चे दरी व टाट-पट्टियों के सहारे बाहर खुले में ले आए। पाठशाला के प्रधानाचार्य नरेश कुमार सहोड के साथ स्कूल के समस्त अध्यापकों ने स्वयं भी बच्चों के साथ इस मॉक ड्रिल में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। बच्चों को बचाव के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। इसके चलते प्रधानाचार्य ने कहा कि आपदा की स्थिति में हौसला रखते हुए स्वयं के साथ-साथ दूसरों की जान बचानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि हड़बड़ाहट में जहां अपनी जान को खतरा बन जाता है, वहीं दूसरों की जिंदगी भी संकट में पड़ सकती है। इस दौरान एनसीसी ऑफिसर सुरेश पन्याली, एनएसएस प्रभारी विशन दास, पीईटी सुनील कुमार व कमल ठाकुर ने भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी।