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Bilaspur News: स्कूलों में छुट्टियों का अपनाया जाए 1960 के दशक का शेड्यूल

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-शिक्षा प्रणाली में बार-बार प्रयोग करना छात्र हित में नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। छात्र और प्रदेश के हित में शिक्षा विभाग को स्कूलों में छुट्टियों का 1960 के दशक का शेड्यूल अपनाना चाहिए। यह एक विडंबना ही है कि देश में आज तक बिठाए गए शिक्षा आयोगों में कोई भी पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाया है। यह बात उच्च शिक्षा प्राप्त अध्यापक संगठन के पूर्व प्रदेश प्रधान और वर्तमान में पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव ठाकुर हुकम सिंह और पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन बिलासपुर के प्रधान जगदीश दिनेश ने कही।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के शिक्षा विभाग और सरकार ने समय-समय पर स्कूलों की छुट्टियों के संबंध में बार-बार जो बदलाव के प्रयोग किए हैं, वह सब निष्फल सिद्ध हुए हैं। इनका परिणाम हर साल भारी बरसात में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि हमारे देश पर सैकड़ों साल तक शासन करने वाले अंग्रेजों ने प्रशासन की हर व्यवस्था अपने अनुकूल निर्धारित की थी, लेकिन हमें यह मानना होगा कि उनमें कई ऐसे विद्वान, शिक्षाविद और विशेषज्ञ भी थे। जिन्होंने स्कूलों में छुट्टियों का शेड्यूल गहन चिंतन और प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रख कर बनाया था। उनके अनुसार भारी बारिश की वजह से हर साल स्कूलों में गर्मियों के अवकाश 1 जुलाई से 31 अगस्त तक रखने का प्रावधान था। इसी प्रकार सर्दियों के अवकाश 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक होते थे। वहीं, 1 अप्रैल से 8 अप्रैल तक स्कूलों में अवकाश रहता था, ताकि विद्यार्थियों को पुस्तकें और कॉपियां खरीदने का समय मिल पाए। उन्होंने कहा कि बार-बार शिक्षा प्रणाली में प्रयोग छात्र हित में नहीं हैं। इसलिए शिक्षा विभाग को स्कूलों में छुट्टियों का 1960 के दशक का शेड्यूल ही जारी करना चाहिए।
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