अमर उजाला ब्यूरो
स्वारघाट (बिलासपुर)।
बच्चे देश का भविष्य माने जाते हैं। लेकिन सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी के चलते शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। नयनादेवी की ग्राम पंचायत स्वाहण के राजकीय प्राथमिक पाठशाला बागी और राजकीय प्राथमिक पाठशाला मेहला (स्वाहण) की हालत इसी को बयान करती है। स्कूल में दो वर्ष से एक अध्यापक और एक खाना बनाने वाले के अलावा कोई भी स्टाफ सदस्य नहीं है। यहां तक कि कोई वाटर गार्ड भी स्कूल में नहीं है। स्कूल में बच्चों की संख्या घटकर 15 रह गई है। बागी स्कूल इंचार्ज पद पर कार्यरत रवि कश्यप और मेहला स्कूल इंचार्ज पद पर कार्यरत राम स्वरूप शर्मा के मुताबिक बच्चों का भविष्य बनाने के लिए वह स्वयं मेहनत कर रहे हैं। स्टाफ की कमी के चलते शिक्षा उपनिदेशक व शिक्षा खंड अधिकारी बिलासपुर को भी कई बार अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन हर बार जल्द समस्या हल किए जाने का आश्वासन मिलता है। उन्होंने मार्च-2015 से अब तक विद्यालय में इंचार्ज संभाला हुआ है। मुख्य अध्यापक का कार्य भी स्वयं ही देखते हैं। अध्यापक की नियुक्ति के संदर्भ में कई बार शिकायत पत्र भेज चुके हैं, लेकिन समस्या वैसे ही बनी हुई है। इससे अभिभावकों को भी बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। अभिभावक निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हो गए हैं। मामला मेरे ध्यान मे आया है। अध्यापकों के रिक्त पद भरने के लिए उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई हुई है। जल्द ही नियुक्ति करवा दी जाएगी। ...देवेंद्र पाल, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर।