होली का त्योहार नहीं मनाएंगे भाखड़ा विस्थापित
आज से चंपा पार्क में शुरू करेंगे क्रमिक अनशन
अवैध कब्जों को लेकर की जा रही कार्रवाई पर एकजुट
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
कोर्ट के आदेशों के बाद बिलासपुर में अवैध कब्जों पर चल रही कार्रवाई पर विस्थापित एकजुट हो गए हैं। विस्थापितों का कहना है कि अपना रोष प्रदर्शन करने के लिए वह होली का त्योहार नहीं मनाएंगे। होली वाले दिन से ही वे शहर के चंपा पार्क में अपना क्रमिक अनशन शुरू कर देंगे। रोजाना छह विस्थापित इस क्रमिक अनशन में बैठेंगे। जरूरत पड़ी तो इसे आमरण अनशन में भी तबदील किया जा सकता है। बिलासपुर में पत्रकारों से बातचीत में नप के उपाध्यक्ष कमलेंद्र कश्यप नेे कहा कि बिलासपुर भाखड़ा विस्थापितों का शहर है। जब भाखड़ा बांध बनने जा रहा था तो यहां पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू 17 बार आए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह बांध कितना जरूरी था देश के विकास के लिए। लेकिन, जिन लोगों ने देश के विकास के लिए कुर्बानियां दीं, आज वे ही अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं। भाखड़ा बांध बनने से पड़ोसी राज्यों में हरित क्रांति आ गई। देश को खाद्यान्न भंडार भरने का मौका मिला। लेकिन, जिन लोगों ने देश के लिए कुर्बानियां दीं, वे ही आज उजड़ने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि यहां के विस्थापितों को चंडीगढ़ में भी बसाने की योजना थी, लेकिन वे नहीं गए। आज चंडीगढ़ का जिस तरह विकास हुआ है, उसी तरह बिलासपुर का भी होना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कमलेंद्र कश्यप का कहना है कि अब जब लोग थोड़ा संभलने लगे थे तो कानून की आड़ में उन्हें डराया जा रहा है। अगर कानून की आड़ में उन्हें डराया गया तो वे इसका विरोध करेंगे, चाहे उन्हें गिरफ्तारियां ही क्यों न देनी पड़ें। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि नलवाड़ी मेले तक अगर सरकार ने इस पर कोई नीति नहीं बनाई तो वे सभी विस्थापितों को एकजुट कर सीएम और भाखड़ा बांध पर जाकर भी प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा वे छह मार्च को कोर्ट में होने वाली पेशी से पहले मुख्य न्यायाधीश को भी विस्थापितों की ओर से खुला पत्र देंगे। इस मौके पर अजय चंदेल, दीपक पाटिल आदि भी मौजूद रहे।