यमुनानगर। गर्मी शुरू होते ही किशोर व युवा पश्चिमी यमुना सहित अन्य नहरों में नहाने पहुंच रहे हैं, पर यहां सुकून की डुबकी जान पर आफत बन सकती है। क्योंकि न तो नहर के घाटों व किनारों पर सुरक्षा के प्रबंध है और न यहां नहाने से रोकने की कोई कार्रवाई है। प्रशासनिक स्तर पर महज चेतावनी बोर्ड लगाकर इतिश्री कर दी गई है।
जिले में अलग-अलग नहरों में डूबने से हर साल करीब औसतन 30 मौनें हो जाती है। ऐसे मामले गर्मियों के अप्रैल से जुलाई के बीच बढ़ जाते है। इनमें सबसे ज्यादा पश्चिमी यमुना नहर के हैं। यह नहर हथिनी कुंड बैराज से दादुपुर, बूड़िया से होकर जगाधरी व यमुनानगर शहर के बीच से निकल रही है। इस बीच नहर की पटरी पर दड़वा, चिट्टा मंदिर-श्रीशनि मंदिर, व बाडीमाजरा पुल व जमना गली समीप घाट हैं।
इनके अलावा अन्य घाटों की दशकों से मरम्मत नहीं हुई। घाटों पर सुरक्षित स्नान के लिए न पकड़ने को जंजीरें हैं न रेलिंग। कई जगह खतरे के सूचक बोर्ड भी नहीं लगे हैं। घाटों से ज्यादा नहर के अन्य जगह किनारों पर युवा व किशोर नहाने पहुंचते हैं, जहां पानी के तेज बहाव में हादसे की आशंका रहती है।
कई जगहों पर नहर किनारे व घाटों समीप नगर निगम और जिला पुलिस की ओर से बोर्ड लगे हैं। इन पर लिखा है कि यहां कपड़े धोना व नहाना सख्त मना है। जबकि इसकी पालना कराने के लिए मौके पर कोई तैनात नहीं है। इस कारण बोर्ड पर लिखे नियम को सिरे से नकारा जा रहा है। इसके विपरीत घाटों पर कम उम्र के बालक, किशोर व युवा नहाते आसानी से दिखाई दे जाते हैं।
पश्चिमी यमुना नहर की सफाई व देखरेख के अभाव में नहर समतल नहीं रही। इसमें अवैध रूप से रेत निकालने से जगह-जगह कुंड बन गए हैं। नहर से सैकड़ों लोगों को डूबने से बचाने वाले व सैकड़ों के शवों को नहर से बाहर निकाल चुके गोताखोर सुखराम पश्चिमी यमुना नहर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। उनकी मानें तो नहर में बने कुंडों से भंवर आने पर प्रशिक्षित गोताखोर का भी बचना मुश्किल है। इनको बंद किया जाना जरूरी है। संवाद
घाटों की सफाई व सुरक्षा की कर चुके मांग
यमुना मईया बचाओ सेवा समिति के संजय मित्तल ने कहा कि संस्था की ओर से कई बार जिला प्रशासन से यमुना को स्वच्छ रखने व घाटों पर स्नान करने की आस्था को कायम रखने के लिए नहर से लगते घाटों पर सफाई सहित सुरक्षा प्रबंध करने की मांग की गई। लेकिन मांग लगातार नजरअंदाज हुई। अगर ऐसा किया जाए तो नहर में डूबने व उससे होने वाली मौत के मामलों पर अंकुश लगेगा। घाटों के अलावा नहर में अन्य जगह नहाने पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस गश्त बढ़ाकर चालान कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
गत दो हफ्ते में हो चुकी चार मौत
25 मार्च - यूपी के अलीगढ़ के एटा के 45 वर्षीय नीरज की होली के दिन दादूपुर समीप पश्चिमी यमुना नहर में डूबने से मौत।
25 मार्च - चिट्टा मंदिर कॉलोनी के 16 वर्षीय साहिल की होली के दिन दादूपुर समीप पश्चिमी यमुना नहर में डूबने से मौत।
28 मार्च - मारवां कला के 18 वर्षीय केशव की फतेहपुर पुल समीप सोम नदी में डूबने से मौत।
छह अप्रैल - पुराना हमीदा के 35 वर्षीय हेमंत की जमुना गली समीप पश्चिमी यमुना नहर में डूबने से मौत।
बच्चों को करें खतरे से आगाह : एडीसी
एडीसी आयुष सिन्हा ने कहा कि अभिभावकों को भी जागरूक रहते हुए बच्चों को नहर में नहाने के खतरे के प्रति आगाह करना चाहिए। इससे इस तरह घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। प्रशासनिक स्तर पर भी इसके लिए प्रयास किए जाते हैं।