जगाधरी। गाबा अस्पताल में उपचाराधीन युवक की मौत पर परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगा हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि युवक पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। मौत से पहले उसने व्हाट्सएप पर मैसेज कर परिवार को इसकी जानकारी दी। युवक ने कहा कि उसकी हालत खराब हो रही है और स्टाफ सो रहा है। बुलाने पर भी उसे देखने कोई नहीं आया है। इसके बाद शुक्रवार को अस्पताल से कॉल आई के उनके मरीज की मौत हो गई है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर की न्यू लक्ष्मीपुरा निवासी 29 वर्षीय अरुण शहर के गाबा अस्पताल में भर्ती था। वह कोविड-19 पॉजिटिव था और 21 अप्रैल को उसे यहां भर्ती किया गया था। उसकी मौत पर शनिवार को परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाए और गेट पर जमा हो गए। सूचना मिलते ही थाना शहर यमुनानगर, थाना हुड्डा पुलिस मौके पर पहुंच गई। उन्होंने नाराज परिजनों को समझा कर शांत किया।
परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ रामपुरा चौकी पुलिस को शिकायत दी है। सहारनपुर निवासी शुभम ने बताया कि उसका भाई अरुण सर्राफ का काम करता था। 20 अप्रैल शाम को उसकी तबीयत बिगड़ी तो उसे घर के पास चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने उस समय दवा देकर उसका कोरोना टेस्ट करवाने को कहा। जिसके बाद वे 21 अप्रैल को गाबा अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने अरुण से बात की और उसका टेस्ट करवाया। जिसके बाद चिकित्सकों ने उसे पॉजिटिव बताया और भर्ती कर लिया। 27 अप्रैल को उनकी अरुण से बात हुई तो उसने कहा कि वह बहुत कमजोरी महसूस कर रहा है। इस बारे वे लोग चिकित्सक से बात करें। वहीं 28 अप्रैल को उसने व्हाट्सएप पर मैसेज कर बताया कि चिकित्सक बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। उसकी हालत तेजी से बिगड़ती जा रही है। बुलाने पर भी स्टाफ ध्यान नहीं दे रहा है। वह तड़प रहा है और स्टाफ सो रहा है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने फोन करके सूचना दी कि उनके मरीज की हालत खराब हो गई है और उसे वेंटिलेटर पर ले जाया गया है। आप 50 हजार रुपये जमा करवा दें। इसके बाद चिकित्सकों ने उसे इंजेक्शन दिया और उसकी मौत हो गई। अस्पताल ने कॉल पर बताया कि अरुण की शुक्रवार को मौत हो गई। जिस पर वे अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने कहा कि अरुण के शव का कोरोना टेस्ट करना होगा। जिसके बाद शव दिया जा सकेगा। शनिवार सुबह टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई। यहां परिजनों ने कहा कि अरुण की मौत के बाद उसके शरीर से कोरोना वायरस तो निकल नहीं सकता है, तो रिपोर्ट निगेटिव किस प्रकार आई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अरुण निगेटिव हो चुका था तो उसकी मौत कैसे हो गई। वहीं जब उसे कोरोना था और इलाज से वायरस शरीर से निकल गया, तो उसकी जान कैसे चली गई। लोगों के हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। उन्होंने लोगों को समझाकर शांत किया। इस बारे परिजनों ने रामपुरा पुलिस को शिकायत दी है।
बेबुनियाद हैं सभी आरोप
गाबा अस्पताल के प्रवक्ता राहुल बेदी ने कहा कि शुभम व उसके परिवार के आरोप बेबुनियाद हैं। चिकित्सक विपरीत परिस्थितियों में अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान बचा रहे हैं। जो इलाज मरीज को दिया गया उसका फाइल में जिक्र है। सभी रिपोर्ट भी संलग्न हैं। डॉक्टर व स्टाफ के स्तर पर कहीं भी कोई लापरवाही नहीं हुई है। अगर लोग इसी तरह आरोप लगाते रहेंगे, तो चिकित्सक इलाज नहीं दे पाएंगे। लोगों को समझना चाहिए कि कोरोना महामारी में डॉक्टर दिन रात काम कर रहे हैं। मरीज की हालत देखते हुए उसे पहले दिन ही दाखिल करने से मना कर दिया था। बावजूद इसके परिवार के निवेदन पर मरीज को दाखिल किया गया। मरीज के 40 प्रतिशत तक फेफड़े खराब हो चुके थे। जो इलाज दिया उसके बारे में परिवार को बताया। बाकायदा उन सब की जानकारी फाइल में लगी है। यह सारा रिकॉर्ड अस्पताल ने थाना शहर यमुनानगर पुलिस को भी दे दिया है। हंगामा अस्पताल की फीस चुकाने को लेकर किया गया है। यह सब अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए किया गया।