दूषित पेयजल की सप्लाई से गांव गांव मुसिंबल में डायरिया फैल गया है। गांव में करीब सौ लोग डायरिया की चपेट में आ गए हैं। शनिवार शाम भारी तादात में डायरिया पीड़ित मरीज सिविल अस्पताल में पहुंचे। इतने मरीजों को देखकर डॉक्टरों तथा स्टाफ सदस्यों के हाथपांव फूल गए। एक बेड पर दो-दो मरीजों को लिटाना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। समाचार लिखे जाने तक स्थिति बेकाबू थी।
डायरिया पीड़ित लाजो, कृष्णा, शोभा और मीना ने बताया कि एक महीने से गांव मेें गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। गंदा पानी पाइप लीकेज के कारण घरों में आ रहा है। पाइप लाइन को ठीक करवाने के लिए कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई गई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। दूषित पानी पीने की वजह से चार दिन से गांव में डायरिया के मरीजों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है। शनिवार को जब स्थिति बेकाबू हो गई, तो मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को दी गई। विभाग ने गांव में एंबुलेंस भेजकर मरीजों को शहर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।
एक बेड पर दो-दो मरीज
शनिवार को शाम को जब एकाएक करीब 40 मरीज सिविल अस्पताल में पहुंचे, तो उन्हें देखकर अस्पताल में मौजूद स्टाफ के हाथपांव फूल गए। मरीजों की संख्या ज्यादा होने की वजह से एक बेड पर दो-दो मरीजों को लिटाना पड़ा। नर्सों ने मरीजों को ओआरएस घोल पिलाया, साथ ही कई मरीजों को ड्रिप लगाई। मरीजों ने बताया कि वे दो-तीन दिन से स्थानीय डॉक्टर से दवा ले रहे थे लेकिन जब आराम नहीं मिला, तो सिविल अस्पताल आना पड़ा।
रात भर गांव में रही डॉक्टरों की टीम
मुसिंबल गांव में मरीजों की भारी तादाद के मद्देनजर डॉक्टरों की टीम ने गांव मेें डेरा डाल लिया है। कार्यवाहक सीएमओ डॉ. रमेश ने बताया कि शनिवार को एसएमओ डॉ. शिवेंद्र के नेतृत्व में टीम ने गांव का दौरा किया जिसमें डॉ. गुरजीत, डॉ. गुरमीत व डॉ. स्वाति सहित आशा वर्कर्स व लैब टेक्नीशियन सहित अन्य स्टाफ सदस्य शामिल रहे। टीम को रात भर गांव में रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि स्थिति को काबू किया जा सके।
गांव में भी मरीजों की भारी तादाद
शनिवार शाम तक सिविल अस्पताल मेें 40 से ज्यादा मरीज पहुंच चुके थे। ग्रामीण बलदेव व सुरेश ने बताया कि गांव में भी भारी तादात में मरीज हैं जो प्राइवेट तथा सरकारी डॉक्टरों से दवा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते पाइप की लीकेज को ठीक करवा दिया जाता, तो डायरिया इतना नहीं फैलता। उन्होंने कहा कि लोगों के घरों में जो पानी सप्लाई हो रहा है, उसमें से दुर्गंध आ रही है।
डायरिया से पीड़ित मरीजों का ब्योरा
सीमा (28) व उसकी बेटी निकिता (10 माह), सुषमा (35) व उसकी बेटी काजल (15), सुंदरी (60), कृष्णा (45), मीना (35), जसमेरी (60), रविंद्र कुमार (13), रणबीर (30), मामचंद (60), रजनी (16), कमला (45), सुनीता (40), अजय (11), लाजो (36), शोभा (14), कुसुम (32), कृष्णा (35), सुखविंद्र (35), देवेंद्र कुमार, अमरजीत, काजल, सुनील, शिल्पी, माला, ज्ञानचंद, गुरमेल, दिलाराम, ङिबंदर कौर, अजमेर, शोभा, मीना, कृष्णा, लाजो डायरिया से पीड़ित हैं।
दूषित पानी सप्लाई की वजह से मुसिंबल गांव में डायरिया फैला है। करीब 40 मरीजों को सिविल अस्पताल जगाधरी में भर्ती कराया गया जबकि गांव में भी 100 मरीज सामने आ चुके हैं। डॉक्टरों की टीम को गांव में तैनात कर दिया है जो वहीं पर डेरा डालेगी ताकि स्थिति को काबू किया जा सके।
डॉ. रमेश कुमार, कार्यवाहक सीएमओ, यमुनानगर।