सरकार एक तरफ शौचालय के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लाखों खर्च कर रही है, दूसरी तरफ प्रशासन इसके प्रति संजीदा नहीं है। नगर निगम के स्टोर में करीब सात लाख रुपये के शौचालय कबाड़ हो गए हैं। ये शौचालय स्टोर में पांच साल से रखे हुए हैं।
इंटीग्रेटेड स्लम हाउसिंग डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत वर्ष 2010 में शहर के विभिन्न स्थानों पर गंध रहित शौचालय रखने की योजना बनाई गई थी। एडीसी कार्यालय के निर्देश पर नगर निगम ने दिल्ली की एक फर्म से 10 निरगंध जेंट्स यूरिनल क्योस्क करीब सात लाख रुपये में खरीदे थे। फर्म से यूरिनल क्योस्क सप्लाई करने के बाद इन्हें नगर निगम के स्टोर में रख दिया गया।
उस समय केवल एक क्योस्क को यमुनानगर बस अड्डे पर रखवाया गया। बाकी सभी क्योस्क आज तक स्टोर से बाहर नहीं निकाले गए हैं। खुले आसमान के नीचे पड़े इन क्योस्क को जंग लग चुका है और ये कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। अब तक नगर निगम में आधा दर्जन से अधिक ईओ आए और चले गए, लेकिन किसी ने इन क्योस्क को सार्वजनिक स्थलों पर रखवाने की जहमत नहीं उठाई।
शहर को है शौचालयों की जरूरत
शहर में कई जगहों पर इन यूरिनल क्योस्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। शौचालय के अभाव में लोग सड़क किनारे दीवारों या खाली प्लॉटों को शौचालय की तरह इस्तेमाल करते हैं। इससे वातावरण तो दूषित होता ही है, शहर की सुंदरता पर भी ग्रहण लग रहा है। स्टोर में पड़े ये क्योस्क सरकारी धन के दुरुपयोग की गवाही दे रहे हैं।
मेरी जानकारी में यह मामला नहीं है। यदि स्टोर में यूरिनल क्योस्क पड़े हैं, तो इनके इस्तेमाल के लिए निगम अधिकारियों से बात की जाएगी।
डॉ. सतबीर सैनी, एडीसी
यूरिनल क्योस्क का इस्तेमाल न कर पब्लिक के पैसे की बर्बादी की गई है। इस बारे में अधिकारियों से बात कर क्योस्क को सार्वजनिक स्थानों पर रखवाया जाएगा।
सरोज बाला, मेयर, यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम