क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे बसे गांव के लोगों के दिलों की धड़कन बढ़ गई है। रविवार को लोग घाटों पर यमुना की स्थिति पर दिनभर नजर रखे रहे। यमुना के उफान पर होने के कारण नदी पार बसे डेरों में रहने वाले लोगों से क्षेत्र के लोगों का संपर्क कट गया है। हालांकि रविवार सायं यमुना में पानी कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली। प्रशासन की ओर से बीडीपीओ रादौर व अन्य अधिकारी रविवार को नदी क्षेत्र के दौरे कर स्थिति का जायजा लेते रहे।
यमुना किनारे डाले पत्थर
शनिवार को जब यमुना में एक लाख क्यूसिक से अधिक पानी छोड़ा गया तो नहर विभाग हरकत में आया। यमुना की बाढ़ को लेकर विभाग की ओर से अब तक विभिन्न घाटों पर लोहे के जाल लगाकर पत्थर लगाने का कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया था, लेकिन जैसे ही शनिवार को यमुना में भारी मात्रा में भारी पानी छोड़े जाने की सूचना विभाग को लगी तो आनन-फानन में विभाग की ओर से गुमथला घाट पर रात के समय ट्रकों से खुले पत्थर घाटों के किनारे डाले गए।
बाढ़ राहत की हो जांच:
एंटी क्रप्शन सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट वरयाम सिंह ने शनिवार की रात को यमुना किनारे खुले पत्थर डालने से विभाग की काय्रप्रणाली संदेह के दायरे मे है। हर वर्ष इसी प्रकार विभाग के अधिकारी व कर्मचारी बाढ़ राहत के नाम पर भारी घोटाला करते हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। इसको लेकर वह पीएम व सीएम को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग करेंगे।
दादुपुर-नलवी नहर के पानी से रादौर क्षेत्र में तबाही
गुरुवार को भारी बारिश के बाद दादुपुर-नलवी नहर टूट गई थी। नहर के पानी से रादौर क्षेत्र के लगभग 35 गांव बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इन गांवों में हजारों एकड़ में खड़ी धान व गन्ने की फसले तबाह हो गई हैं। बाढ़ का पानी एक गांव से दूसरे गांव में तबाही मचाते हुए फसलों को रौंदता जा रहा है। अब बाढ़ का पानी टोपराकलां से आगे बढते हुए गांव नगला, झगुडी, बैंडी, खजूरी, मंसुरपुर, बंसतपुरा, चमरोडी, नागल, पलाका, बकाना आदि गांवों तक पहुंच गया है। इससे इन गांवों में सैकड़ों एकड़ फसले डूब गई हैं।
सुध लेने नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
गांव झगुड़ी निवासी रामकुमार रामा, पदम सिंह सरपंच झगुड़ी, एडवोकेट रणबीर सिंह नगला, सरपंच छारी जरनैल सिंह मोर ने बताया कि उनके गांव में बाढ़ के पानी ने भारी तबाही मचाई है। पानी से धान की फसल बर्बाद हो गई है। अब किसानों को बाढ़ का पानी कम होने पर दौबारा धान की रोपाई करनी पड़ेगी। प्रशासन का कोई अधिकारी व कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है। उन्हें रामभरोसे छोड़ दिया गया है। प्रभावित गांवों के किसानों ने सरकार से फसले खराब होने पर मुआवजे की मांग की है।